चैप्टर 1: कंप्यूटर सामान्य परिचय (Computer Basics in Hindi)

कंप्यूटर क्या है: कंप्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो डाटा इनपुट डिवाइस के द्वारा यूजर से लेता है, उसे प्रोसेस करता है और हमें निश्चित रूप में आउटपुट देता है| कंप्यूटर ये सारी चीजें बहुत ही तीव्र गति से करता है|

PAGE INDEX:
1. कंप्यूटर को समझने से पहले वे शब्द जिसका उपयोग हम आगे करेंगे
2. कंप्यूटर के विभिन्न अंग (Parts of Computer System)
3. कंप्यूटर सिस्टम के घटक
4. सीपीयू की गति को प्रभावित करके वाले कारक
5. कंप्यूटर की विशेषताएं
6. कंप्यूटर की सीमाएँ
7. कंप्यूटर के उपयोग
8. सीबीएसई उपयोगी संसाधन

कंप्यूटर को समझने से पहले वे शब्द जिसका उपयोग हम आगे करेंगे:

डेटा (Data): तथ्यों और सूचनाओं के अव्यवस्थित संकलन को डेटा कहते हैं| डेटा को दो प्रकारों में बाँटा जा सकता है:

  • संख्यात्मक डेटा (Numerical Data): यह अंको से बना डेटा है जिसमे 0 से लेकर 9 तक के अंको का प्रयोग किया जाता है| इस तरह के डाटा पर हम अंकगणितीय क्रियाए कर सकते हैं|
    जैसे: कंपनी के अंदर क्रमचारियों की संख्या, क्रमचारियों का बेतन आदि|
  • चिन्हात्मक डेटा (Alphanumeric Data): इसमें अक्षरों, अंको तथा चिन्हों का प्रयोग किया जाता है| इसमें अंकगणितीय क्रियाए नहीं की जा सकती है, पर इनकी तुलना की जा सकती है|
    जैसे: कर्मचारीयों का पता|

डेटा प्रोसेसिंग (Data Processing): डेटा के उपयोगिता के आधार पर किया जाने वाला विशलेषण डेटा प्रोसेसिंग कहलाता है|

सुचना (Information): डेटा के उपयोगिता के आधार पर किये गए विशलेषण और संकलन के बाद प्राप्त तथ्यों को सुचना कहते हैं|

सुचना प्राप्ति (Information Retrieval): आवश्कतानुसार सुचना को पुन: प्राप्त करने की विधि सुचना-प्राप्ति कहलाती है|

डेटाबेस (Database): यह डाटा का डिजिटल शैली में व्यवस्थित संकलन है जिसका उपयोग विभिन्न रूपों में किया जा सकता है|

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (Database Management System): डिजिटल डेटाबेस के प्रबंधन, उसमे परिवर्तन, प्रोसेस तथा संकलन करने के लिए प्रयुक्त सॉफ्टवेर को डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम कहा जाता है|

इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रोसेसिंग (Electronic Data Processing): इलेक्ट्रॉनिक विधि से डेटा का विशलेषण इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रोसेसिंग कहलाता है|

अनुदेश (Instruction): कंप्यूटर को कार्य करने के लिए दिए गए आदेश को अनुदेश कहते हैं|

प्रोग्राम (Program): कंप्यूटर को दिए जाने वाले अनुदेशों के समूह को प्रोग्राम कहा जाता है|

सॉफ्टवेर (Software): प्रोग्रामों के समुच्चय को, जो कंप्यूटर के विभिन्न कार्यों के सफल क्रियावयन के लिए उत्तरदायी होता है उसे सॉफ्टवेर कहते हैं|

कंप्यूटर के विभिन्न अंग (Parts of Computer System)

जैसा की हम जानते हैं, उपकरणों का एक समूह जो एकसाथ मिलकर डेटा प्रोसेस करता है कंप्यूटर कहलाता है| कंप्यूटर सिस्टम में अनेकों इकाईयां होती हैं जिनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक डाटा प्रोसेसिंग में होता है| बुनियादी कंप्यूटर प्रोसेसिंग चक्र में इनपुट, प्रोसेसिंग और आउटपुट शामिल होते हैं|

कंप्यूटर सिस्टम के घटक

(1.) इनपुट यूनिट (Input Unit): इनपुट इकाई यूजर (User) से डेटा प्राप्त कर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को इलेक्ट्रॉनिक प्लस के रूप में प्रवाहित (transmit) करता है|

उदहारण स्वरुप आप एटीएम (ATM) मशीन को देखें, जब भी हम एटीएम से रुपए निकासी करते हैं, तब हमें पिन नंबर डालना पड़ता है| इनपुट हम इनपुट डिवाइस के द्वारा डालते हैं|

इनपुट डिवाइस के कुछ उदहारण जिसके बारे में हम आगे के चैप्टर में पढेंगे: की-बोर्ड, माउस, जोस्टिक, प्रकाशीय पेन, स्कैनर, बार कोड रीडर इत्यादि|

(2.) सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit): CPU का कार्य होता है दिए गए डेटा को प्रोसेस करके सूचनाये देना जो कि आउटपुट डिवाइस के माध्यम से होता है|

CPU से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बातें:

  • इसके उंदर ही प्रोसेसर होता है|
  • यह एक इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप है जो डेटा को इनफार्मेशन में बदलते हुए प्रोसेस करता है|
  • इसे कंप्यूटर का ब्रेन कहा जाता है|
  • यह कंप्यूटर सिस्टम के सारे कार्यों को निरंत्रित करता है तथा यह इनपुट को आउटपुट में रूपांतरित करता है|

CPU को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा गया है:

i. कण्ट्रोल यूनिट
ii. अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट
iii. मेमोरी

(i.) कण्ट्रोल यूनिट (Control Unit): कण्ट्रोल यूनिट कंप्यूटर की आन्तरिक क्रियाओ को संचालित करके, उन्हें नियंत्रित करती है| तत्पश्चात इन क्रियाओं का ए.एल.यू तथा मैमोरी में आदानप्रदान करती है|

(ii) अर्थ मैटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit): यहाँ ध्यान देने वाली बात है आप इसके नाम को ध्यान से पढ़ें, यह सभी प्रकार के अर्थ मैटिक और लॉजिकल क्रियाये करती है| ALU कण्ट्रोल यूनिट से डेटा तथा निर्देशों को प्राप्त करके उन्हें क्रियान्वित करता है| तत्पश्चात डेटा तथा निर्देशों को सूचना के रूप में मैमोरी में भेज देता है|

(iii) मैमोरी (Memory): यह डेटा तथा निर्देशों को संग्रह करने में प्रयुक्त होता है| मेमोरी के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं प्राइमरी मेमोरी तथा सेकेंडरी मैमोरी|

आगे पढने के लिए पृष्ट 2 पर जाए…

सीपीयू की गति को प्रभावित करके वाले कारक:

(i) शब्द परास (Word Length):

शब्द परास बाइनरी अंको (Bit) की वह संख्या है, जो कंप्यूटर एक बार में प्रोसेसिंग के लिए लेता है| शब्द परास अधिक होने से कंप्यूटर की गति बढ़ जाती है| शब्द परास की लम्बाई 8, 16, 32 या 64 बिट (Bit) तक हो सकती है|

(ii) कंप्यूटर घड़ी (Computer Clock):

कंप्यूटर में एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तन क्लॉक प्लस (Clock Plus) के आने पर होता है जिसे कंप्यूटर घड़ी द्वारा पैदा किया जाता है| कंप्यूटर घड़ी द्वारा क्लॉक प्लस जितनी जल्दी-जल्दी भेजा जाएगा, कंप्यूटर उतना ही तेज कार्य करेगा| यहाँ आपको बता दें कि इसकी गति को प्रति सेकेण्ड प्लस की संख्या या हर्ट्ज़ (Hz) में मापा जाता है|

(iii) कैश मेमोरी (Cache Memory): 

यह मुख्य मेमोरी से आवश्यक डेटा को लाकर रखता है ताकि जरुरत पड़ने पर तीव्र गति से सीपीयू को दिया जा सके| यह मेमोरी तथा कंप्यूटर की गति के बीच तालमेल स्थापित करने का कार्य करता है| इससे कंप्यूटर की गति (Speed) में वृद्धि होती है|

(iv) समानांतर गणना (Parallel Operation): 

एक साथ कई निर्देशों के क्रियान्वयन से सीपीयू कि क्षमता का बेहतर उपयोग होता है जिससे कंप्यूटर की गति बढ़ती है|

(v) सीपीयू और अन्य उपकरणों के बीच समन्वय (Integration between CPU and Peripherals): सामान्यतया सीपीयू तीव्र गणना करता है अतः अन्य उपकरणों के धीमा होने से कंप्यूटर की गति प्रभावित होती है|

कंप्यूटर की विशेषताएं

गति (Speed): एक सेकण्ड में लाखों गणनाएँ करने की क्षमता|

स्वचालित (Automatic): कंप्यूटर बहुत सारे कामों को ख़ुद से अंजाम दे सकता है, जैसे गणना कि क्रिया करना, गणना के दौरान मानव हस्तछेप नगण्य|

त्रुटिहीन कार्य (Accuracy): गणना में त्रुटी लगभग नगण्य होती है, होती भी है तो उसका कारण मुख्यतः मानव द्वारा प्रोग्राम या डेटा में गलती हो|

स्थायी भण्डारण क्षमता (Permanent Storage Capicity): सूचनाये इलेक्ट्रनिक तरीके से संगृहीत की जाती है|

विशाल भण्डारण क्षमता (Huge Storage Capicity): कंप्यूटर के विभन्न संगृहित माध्यमों (हार्ड डिस्क, CD रोम इत्यादि) में असीमित डेटा तथा सूचनाओ का संग्रहण किया जा सकता है|

जल्द निर्णय लेने कि क्षमता: कंप्यूटर सूचनाओं का तीव्र विश्लेषण कर त्वरित निर्णय लेना और देना है|

विविधता: कंप्यूटर की सहायता से विभिन्न प्रकार के कार्य संपादित किये जा सकते हैं|

पुनरावृति: कंप्यूटर से एक कार्य को बारबार करवाया जा सकता है|

स्फूर्ति (Agility): एक मशीन होने के कारण कंप्यूटर को कार्य संपादन में थकान या बोरियत जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता|

गोपनीयता (Secrecy): कंप्यूटर में संगृहित सूचनाएँ अगर उपयोगकर्ता चाहे तो पासवर्ड का उपयोग कर गोपनीय रख सकता है|

कार्य की एकरूपता (Uniformality of Work): कार्यों की लगातार पुनरावृति से भी कंप्यूटर की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है|

कंप्यूटर की सीमाएँ

(i) बुद्धिहीन (No Brain): कंप्यूटर में स्वयं की सोचने और निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती| यह केवल दिए गए निर्देशों के अन्दर ही कार्य कर सकता है|

(ii) खर्चीला (Expensive): कंप्यूटर के हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेर काफ़ी महँगे होते हैं तथा इन्हें समय-समय पर आवश्कतानुसार परिवर्तित भी करना पड़ता है|

(iii) वायरस का खतरा (Immune to Virus): कंप्यूटर में वायरस का खतरा बना रहता है जो सुचना और निर्देशों को दूषित या समाप्त कर सकता है| ये वायरस कंप्यूटर कि भण्डारण क्षमता को भी प्रभावित करते हैं| हालाँकि मार्केट में बहुत सारे एंटी वायरस मौजूद है जिनसे इन परेशानियों से बचा जा सकता है|

(iv) विद्दुत पर निर्भरता (Depends on Electricity): कंप्यूटर अपने कार्य के लिए विद्दुत पर निर्भर रहता है| विद्दुत नहीं रहने पर कोई भी कार्य कंप्यूटर के द्वारा संभव नहीं है|

कंप्यूटर के उपयोग

  1. बैंक में
  2. रेलवे, बस तथा वायुयान के आरक्षण में
  3. वेज्ञानिक अनुसन्धान
  4. शिक्षा
  5. मनोरंजन
  6. संचार में
  7. प्रकाशन में
  8. चिकित्सा विज्ञान में
  9. प्रशासन में
  10. व्यापार में
  11. रक्षा में
  12. मौसम की जानकारी प्राप्त करने में
 Chapter 2: कंप्यूटर का विकास (Development of Computer)

इसे भी पढ़ें: A से लेकर Z तक कंप्यूटर के शब्दकोश (Abbreviation of Computer A to Z in Hindi)

सीबीएसई उपयोगी संसाधन

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शुभकामनाएँ…!!!


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