किसानो की गरीबी दूर करती वज्रदंती की बहुमूल्य खेती ?

वैसे तो भारत में अनेकों वनस्पतियों और औषिधयों की खेती की जाती है , पर कुछ खेती इतनी प्रसिद्ध नहीं हो पाती जितनी उनको होनी ही चाहिए , वज्रदंती की खेती भी उन्ही में से एक मानी जाती है , वज्रदंती का इतिहास भारत में प्राचीनतम काल से ही मिलता आ रहा है | WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट कहती है कि वज्रदंती भारत में सबसे ज्यादा पाया जाता है ,इसके बावजूद भी इस खेती के लिए ना तो सरकार ही कोई ठोस कदम उठा रही है और ना ही किसी के मन में भी इसपर कोई विचार आ रहा है | आज की युवा पीड़ी भी इसको लेकर कोई ख़ास उत्साहित नहीं दिखती |अगर इस खेती का अस्तित्व मिट जायेगा तो इससे पर्यावरण को एक मूल्यवान औषधि का भी नुक्सान हो सकता है |  वज्रदंती को बर्लेरिया प्रोनिसिटिस के नाम से जाना जाता है। 

इससे होने वाले महत्वपूर्ण फायदे –

दन्त रोगों पर असरदार अगर आपके मसूडो या दांतो से खून आ रहा है। दांतो मे सेंसिटाईजेसन की प्रोब्लम है या फिर दांतों मे कैविटी है तो आपके लिए व्रजदंती का पौधा काफी उपयोगी होगा। इसकी जड़ं से तैयार जड़ीबूटी से कुल्ला करने से यह समस्याएं खत्म हो जाती है। और आप वज्र दंती के पत्तों या जड़ का पाउडर बनाकर उसे दंतमंजन की तरह से यूज कर सकते है। ये आपके लिए काफी उपयोगी होगा।
बालों के लिए अति उपयोगी इसकी पत्तियों का पेस्ट बनाकर सिर पर लगाने से यह आपके बालों के लिए काफी उपयोगी होगा। यह आपके बालों की ग्रोथ तो बढ़ाएगा ही साथ ही आपकी फटी एडियों से निजात दिलाने मे भी काफी उपयोगी होगा। कुल मिलाकर कहें तो भारत में होने वाला वज्रदंती हर लिहाज से सबसे ज्यादा कामगार है।
बुखार पर असरदार – वज्रदंती के ताजे पत्ते लेकर उन्हें सुखाकर कटोरे में पानी में डाल कर काढ़ा बना लें इसे छान लें, और दिन में दो बार इसका सेवन करें इस प्रक्रिया को करने आप बुखार पर नियंत्रण कर सकते हैं
एंटीबायोटिक गुण वज्रदंती की पत्तियों का पेस्ट बनाकर घावो, फोड़ों पर लगाने से दर्द से राहत मिलती है तथा सूजन भी कम हो जाती है।

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

यह ठन्डे प्रदेशों में उगाई जाने वाली विशेष औषधि है | इसको उगाने के लिए ठन्डे प्रदेशों की जलवायु का अधिक महत्व है घाटी प्रदेशों में बर्फ के समाप्त होते ही इसका फैलाव शुरू हो जाता है | भारत में उत्तराखंड इसकी खेती के लिए विश्व प्रसिद्ध है | यहाँ इसकी खेती काफी बड़े पैमाने पे की जा रही है |खास तौर पर मदमहेश्वर घाटी में आप जाएंगे तो आपको यहां वज्रदंती हर जगह दिखेगा। इसकी खेती में अचानक से आई गिरावट एक चिंता का विषय बनती आ ही है

बीज कहाँ से खरीदें –

खेती करने के लिए आप बीजों का चुनाव उसकी गुणवत्ता के आधार पे कर सकते है ,इसके लिए आप किसी भी सरकारी मान्यता प्राप्त बीज भण्डारण केंद्र से खरीद सकते हैं , आप अपने राज्यों की सरकारी बीज भंडारण केंद्र से भी सम्पर्क कर सकते हैं , यदि आपके राज्य में इसकी उपलब्धता नहीं भी होगी आप इसके लिए मांग भी कर सकते है |

बुवाई करने की सही विधि –

इसके बीजों को भी आप पहले साफ़ कर लें उसके बाद आप इन बीजों को एक जगह सुखा दें कुछ समय के लिए ,उसके बाद आप उसे अंकुरित कर दें , अंकुरण करने के पश्चात आप मिटटी को क्यारी नुमा बनाकर इसकी बुवाई कर सकते हैं | आपको बुवाई करते समय यह याद रखना है की इसकी जड़ों में ही औषधि मौजूद होती है ,इसलिए रुपाई करने के समय आप इसमें निश्चित दूरी बनाकर ही इसकी बुवाई करें ताकि ,जड़ें सफलतापूर्वक अपना आकार ले सकें |

सिंचाई करने की सही विधि

सिंचाई इस बात पर निर्भर करेगा की आप इसकी खेती कहाँ कर रहे हैं अगर आप इसकी खेती किसी पहाड़ी क्षेत्र में करते हैं तो आपको अतिआवश्यक सिंचाई करने की आवश्यकता नहीं पड़ने वाली है |क्यों की यहाँ के तापमान के अनुसार ये अपने आपको पूर्ण रूप से ढाल लेता है , अगर आप इसकी खेती किसी मैदानी भाग में करते हैं तो आपको ये ध्यान देने की जरुरत होगी की ये एक ऐसा पौधा है जिसकी उपयोगिता उसके जड़ों में ही रहती है इसलिए आप इसकी जड़ों में अधिक मात्रा में सिचाई करें ताकि मैदानी भागों में इसकी खेती करने में आपको किसी भी तरह की समस्या का सामना ना करना पड़े ,आपको 1 से 2 दिन के अंतराल तक कुछ दिनों के लिए इसकी सींची करने आवश्यक होगी |

खरपतवार पर नियंत्रण

यह एक सख्त फसल होने के कारण खरपतवार को अधिक पैदा नहीं होने देता है , आपको फिर भी शुरुवात के दिनों में इसकी देखरेख करनी ही पड़ेगी लगभग 15 दिनों के अंतराल पर आप इसकी निराई गुड़ाई कर सकते हैं |इसमें आप उन पैधों को अलग करेंगे जो इसकी जड़ों के समीप उगे होंगे |

रोगों से फसल का बचाव

इसमें भी सभी फसलों की तरह कुछ महत्वपूर्ण रोग लग ही जाते हैं , जिनसे आपको इसकी देखभाल करनी पढ़ सकती है | इसको आपको अत्यधिक रसायनों के छिडकाव की जरुरत नहीं होगी ,इससे इसे क्षति भी पहुच सकती है |

फसल की कटाई कब करनी चाहिए

लगभग जब इसमें फूल आने शुरू हो जांए इसके रंग में भी हल्का बदलाव आने लगे तब आप समझ सकते हैं , आप पहले एक पौधे को उखाड़कर उसकी जड़ों में जांच कर सकते हैं यदि जड़ों में फैलाव आ जाए तो उसके बाद आप इसे पूर्ण रूप से फसल की कटाई कर सकते है |कटाई एक नियमित अंतराल में की जानी चाहिए इसके समय में अधिक अंतराल ना करें |इससे आपकी फसल खराब हो सकती है |

माल का एक्त्रिकर्ण

फसल की कटाई के पश्चात आप इसको एक जगह रख लें ,और आप इसकी फसल को काटने के पश्चात जो लायक ह केवल उसको रख लें ,इससे आपकी फसल की गुणवत्ता बनी रहेगी |

अपना माल कहाँ बेचें

वज्रदंती एक बहुत अमूल्य वनस्पतियों में से एक मानी गयी है , इसकी मांग सदेव बढती ही रहती है , इसकी अधिकाँश खेती फार्मा कम्पनी के द्वारा की जाती है ,जिसके लिए किसानो को एडवांस भी दिया जाता है या कई कम्पनी इसकी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तौर पे भी कराती है |जिसके लिए किसानो को एक अच्छी खासी रकम भी दी जाती है |वज्रदंती की खेती में लाभ की पूरी ही सम्भावना होती है क्यों की ये एक दलहन फसल होने के साथ साथ नकदी फसल भी है आप अपने निकट के व्यापारियों से सम्पर्क करके भी इसे अपनी इच्छा के अनुसार बेच सकते हैं या आप चाहें तो अपनी खुद की पैकिंग देकर भी इसको बेच सकते हैं आप ऑनलाइन के माध्यम से भी सीधे इसे रिटेल अथवा होलेसले के माध्यम से बेच सकते हैं। और एक अच्छा लाभ भी कमा सकते हैं ऑनलाइन के माध्यम से आप इसे अमेज़न, फ्लिप्कार्ट, बिगबास्केट, इंडिया मार्ट जैसी कम्पनी के माध्यम से अपना माल सीधे तौर पे भी बेच सकते हैं। या अगर आप चाहें तो पुरानी दिल्ली की मशहूर खारी बावली जो की पुरे एशिया महादीप की सबसे बड़ी अनाज मंडी है वहां जाकर किसी भी व्यापारी से बातचीत करके भी अपना माल बेच सकते हैं।

आशा करते है वज्रदंती की खेती से जुड़ी यह लेख आपको पसंद आयी होगी। अपने किसान भाईयों को जागरूक कर स्वरोज़गार मुहैया कराने हेतु शुरुवात की गयी इस मुहीम से जुड़े रहने के लिए हमें सब्सक्राइब करना न भूले। इसी तरह की जानकारी पाने के लिए एडुफ़ीवर ग्रामीण शिक्षा को अपना सहयोग दे। अरहर के उत्पादन से जुड़ी किसी भी तरह के समस्याओं के समाधान हेतु नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना न भूले।

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