तुलसी की खेती: कैसे करें, क़िस्म, मुनाफा, फायदे, ख़र्च, जलवायु, कहाँ बेचे इत्यादि।

तुलसी की खेती: जहाँ तुलसी घरों की आँगन की शोभा तक सीमित थी वही अब इसकी खेती से किसानो को मिल रही लाभ बढती जा रही है। चाहे वह  कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग हो या अपनी निजी खेती तुलसी की खेती से किसानो को केवल लाभ ही मिला है। भारत में तुलसी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। हिन्दू धर्म में तुलसी की पूजा की जाती है। लोग रोज़ इसमें जल देते हैं। और अपने आँगन में बड़े सम्मान से इसे पूजते हैं।

तुलसी की उपयोगिता

तुलसी के अनेक फायदे है इसे दवाइयां बनाने से लेकर ब्यूटी प्रोडक्ट्स सभी बनाने के काम में लिया जाता है। दवा बनाने वाली कम्पनी के अनुसार सामान्य रोगों से लड़ने के लिए जो भी दवा बनायीं जाती है उसमें सबसे बड़ी भागीदारी तुलसी की ही होती है।

तुलसी को खाने से होने वाले फायदे

  • सर्दी जुकाम में कारगर: तुलसी के पत्तों को उबालकर छानकर उसका काडा बनाकर पीने से आप इससे निजात पा सकते हैं।
  • सांस से सम्बंधित रोगों में: सांस से सम्बंधित सभी रोगों में भी ये लाभदायक साबित हुवा है। पत्तों को पीसकर दूध में मिलाकर  पीने से इस रोग से निजात पाया जा सकता है।
  • पेशाब में जलन होने पर: पेशाब में जलन होने पर भी यह असरदार है अगर आप इसकी पत्तियां पीसकर खाने से इससे निजात मिलता है।
  • सांप के काटने पर: सांप के काटने पर भी इसका लाभ मिलता है सांप के काटने के तुरत बाद इसके पत्तों को अगर आप पीसकर काटे हुए भाग पर लगा लें तो ज़हर का असर कम होता है। आप चाहें तो इसकी जड़ों को पीसकर घी मिलकर भी काटे हिस्से पर लगा सकते हैं।
  • तनाव में लाभकारी: डॉक्टरों के अनुसार अत्यधिक तनाव होने पर आप प्रतिदिन 10 से 12 तुलसी के पत्तों को चबाना चाहिए इससे आपको लाभ मिलेगा।
  • मधुमेह रोग पर असरदार: इसमें उपस्थित तत्व ब्लड में शुगर की मात्रा को कम करने में सहायक होते है। व इन्सुलिन को भी कम किया जा सकता है।
  • बुखार दूर करे: तुलसी में एंटीबैक्टेरिया, एंटीफंगलएंटीबायोटिक प्रोपर्टीज होती है, जो बुखार को भी कम करने में लाभ कारी होता है। चाहें वो बुखार इन्फेक्शन वाला हो या मलेरिया वाला, तुलसी उसे कम करने में सक्षम है। आयुर्वेद में बुखार के समय तुलसी का काड़ा पीने की सलाह दी जाती है इससे बुखार से निजात भी मिल जाता है।

तुलसी में पाए जाने वाले तत्व

1 कप यानि 42 ग्राम तुलसी के पत्तों में निम्न पोषक तत्व पाए जाते हैं।

क्र.म.पोषक तत्वमात्रा
1.प्रोटीन1.3 ग्राम
2.पानी38.7 ग्राम
3.ऐश0.6 ग्राम
4.कुल कैलोरी9.8
5.कार्बोहाइड्रेट्स1.1 ग्राम
6.कुल फैट271 mg
7.कैल्सियम75 mg
8.आयरन1.3 mg
9.सोडियम1,7 mg
10.पोटैशियम125 mg
11.मैग्नीशियम27 mg
12.फॉस्फोरस24 mg
13.विटामिन A C E K B6क्रमशः (2237 iu, 7.6 mg,
339 mcg, 176 mcg, 66 mcg)

तुलसी के विभिन्न प्रकार

  • बेसिल तुलसी या फ्रेंच बेसिल
  • स्वीट फेंच बेसिल या बोबई तुलसी
  • कर्पूर तुलसी
  • काली तुलसी
  • वन तुलसी या राम तुलसी
  • जंगली तुलसी
  • होली बेसिल
  • श्री तुलसी या श्यामा तुलसी

इसे भी पढ़ें: हिंदी में तुलसी, संस्कृत में सुलभा, ग्राम्या, बहूभंजरी एवं अंग्रेजी में होली बेसिल के नाम से जाना जाता है। लेमिएसी कूल (Lamiaceae) के इस पौधे की विश्व में 150 से ज्यादा प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इसकी मूल प्रकृति एवं गुण एक समान हैं।

खेती के लिए अनुकूल जलवायु

इसकी खेती, कम उपजाऊ जमीन जिसमें पानी की निकासी का उचित प्रबंध हो, अच्छी होती है बलूई दोमट जमीन इसके लिए बहुत उपयुक्त होती हैं। इसके लिए उष्ण कटिबंध एवं कटिबंधीय दोनों तरह जलवायु होती है।

खेती के लिए उचित समय

इसकी खेती के लिए आप अगस्त से जुलाई के मध्य के समय का चयन कर सकते हैं। ये समय इसकी खेती के लिए सबसे अनुकूल है।

खेत की तैयारी किस प्रकार से करें

  • जुताई करने से पहले खेत में खाद दाल देनी चाहिए उसके बाद आप खेत की जुताई करें। ताकि खाद अछि तरह से मिटटी में मिल सके और खेत को खेती के लिए अनुकूल बनाया जा सके।
  • खेत में आखिरी जुताई करते समय 100 किलोग्राम यूरिया, 500 किलोग्राम सुपर फास्फेट और 125 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश को एक हेक्टेयर के हिसाब से भूमि में मिला दें।

 बीज की खरीदारी

  • बीज की खरीदारी करते समय उसकी गुड़वत्ता का ध्यान ज़रूर देना चाहिए इसके लिए आप सरकारी संसथान से लेकर किसी भी मान्यता प्रात बीज भण्डारण केंद्र से इसे खरीद सकते हैं।
  • 1 बीघा पर खर्चा 1500 रुपए आया। इस तरह से 10 बीघा जमीन पर फसल लगाने पर कुल लागत 15 हजार रुपए आई।

बुवाई की सही विधि

सूखे मौसम में रोपाई हमेशा दोपहर के बाद करनी चाहिए। रोपाई के बाद खेत को सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए। बादल या हल्की वर्षा वाले दिन इसकी रोपाई के लिए बहुत उपयुक्त होते हैं। इसकी रोपाई लाइन में लाइन 65 से. मी. तथा पौधे से पौधे 35 से. मी. की दूरी पर करनी चाहिए।

सिंचाई की सही विधि

  • पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद करनी चहिए। उस के बाद मिट्टी की नमी के मुताबिक सिंचाई करनी चहिए।
  • गर्मियों में हर महीने 3 बार सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है। बरसात के मौसम में यदि बरसात होती रहे, तो सिंचाई की कोई जरूरत नहीं पड़ती है।

खरपतवार पर नियंत्रण

बुवाई से पहले गहरी निराई की जाती है। खरपतवार की सभी जड़े हाथों से एकत्रित करके हटा दी जाती है। अच्छे प्रंबधन के अंतर्गत खेत को खरपतवार मुक्त रखने के लिए 4 या 5 बार निराई की आवश्यकता होती है। निराई को हाथ से या ट्रेक्टर चालित कल्टीवेटर द्वारा किया जा सकता है।

तुड़ाई करने की सही विधि

इसकी तुड़ाई करने के लिए तेज़ धुप वाला दिन सबसे उपयुक्त होता है। फसल के लगभग 100 दिन पूरे होने पर आप इसकी तुड़ाई कर सकते हैं। पत्ती उत्पादन के लिए फूलों को प्रारंभिक स्तर पर पत्तियों की तुड़ाई की जाती है। ताकि पत्तियां दोबारा आ सके और आखिर में जब पूर्ण फसल कटाई की जाती है तब पौधों को जड़ से उखाड़ दिया जाता है।

पत्तियों को सुखाना

पत्तियों को तोड़ने के बाद इसको एकत्रित करके सुखाना भी बेहद ज़रूरी होता है। सुखाते समय ध्यान दिया जाना चाहिए की पत्तियों को ठन्डे स्थान पर सुखाया जा सके अधिक धुप भी न लग सके।

माल की बिक्री

संभवतः सभी फसलों की तरह इस फसल का उद्देश्य भी यही होता है की पैदावार होने के बाद इसको अच्छे मुनाफे में बेचा जा सके। इसकी बिक्री आप ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन दोनों माध्यम से कर सकते हैं ऑनलाइन के लिए आप अमेज़न, फ्लिप्कार्ट, इंडिया मार्ट, एक अच्छा उदहारण हैं या आप चाहें तो कई मेडिसन कम्पनी से कॉन्ट्रैक्ट लेकर भी इसको कर सकते हैं। कई आयुर्वेदिक कम्पनी भी इसकी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कराती हैं। आप इसमें कम लागत लगकर एक बड़ा मुनाफा कम सकते हैं। ये कहना हैं उन किसानो का जो इसकी पैदावार करते हैं।

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