स्ट्रॉबेरी की खेती कैसे करें? जानें कमाई, कीमत, लाभ, स्ट्रॉबेरी का भाव।

स्ट्रॉबेरी की खेती
स्ट्रॉबेरी की खेती

स्ट्रॉबेरी (Strawberry) फ़्रागार्या जाति का एक पेड़ होता है,जो अपने फल के लिये पूरी दुनिया भर में जाना जाता है।
इसका सुंदर फल का उपयोग एसेंस के रूप में किया जाता है।

स्ट्रॉबेरी लाल रंग की होती है। इसे ताजा फल के रूप में भी खाया जाता है. इसे संरक्षित कर जैम, रस, पाइ, आइसक्रीम, मिल्क-शेक, टोफियाँ आदि के रूप में भी इसका सेवन किया जाता है। इसे हम टेस्ट के लिया खाते हैं इसके मिश्रण से स्वाद को असीमित दायरे तक बढाया जा सकता है इसलिए भी इसका उपयोग किया जाता है। दुनिया भर में ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाने में इसकी एक अहम् भूमिका होती है। ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इसकी अतुल्य देनदारी है।

स्ट्रॉबेरी का इतिहास

भारत में स्ट्राबेरी की खेती 1960 में सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में की गयी थी। परन्तु उपयुक्त किस्मों की अनुउपब्धता तथा तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण इसकी खेती में अब तक कोई विशेष सफलता नहीं मिल सकी ये तब तक केवल ठन्डे प्रदेशों में उगने वाला एक फल था जो भारत में कम देखने को मिलता था।

स्ट्रॉबेरी में मिलने वाले तत्व

S.No. तत्व मात्रा
1. पानी 89.9 ग्राम
2. प्रोटीन 0.7 ग्राम
3. वसा 0.5 ग्राम
4. कार्बो हाइड्रेट 8.4 ग्राम
5. विटामिन ए 6.0 अं. इ.
6. थायोमिन बी0. 0.3 मिलीग्राम
7. राईबोफ्लेबिन बी 0.07 मिलीग्राम
8. नियासीन 0.60 मिलीग्राम
9. एस्कार्निक एसिड (विटामिन सी) 59.0 मिलीग्राम
10. कैल्शियम 21.0 मिलीग्राम
11. फास्फोरस 21.0 मिलीग्राम
12. लोहा 1.0 मिलीग्राम
13. सोडियम 1.0 मिलीग्राम
14. पोटैशियम 164 मिलीग्राम

स्ट्राबेरी के अदभुत फायदे

  1. डायबिटीज़ पर प्रभावी: स्ट्रॉबेरी में 40 ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है जो काफी कम होता है। इसका मतलब है कि डायबिटीज़ के मरीज़ बिना ज्यादा चिंता किए इसे खा सकते हैं।
  2. स्ट्रॉबेरी में ऐसे घटक होते हैं जो डायबिटीज़ के मरीज़ों के ग्लूकोज़ लेवल और लिपिड प्रोफाइल पर अच्छा असर डालते हैं।
  3. नियमित रूप से स्ट्रॉबेरी खाने से डायबिटीज़ का जोखिम भी कम हो जाता है। स्ट्रॉबेरी में उपस्थित फोलिक और विटामिन सी शरीर को कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारियों से बचाने में मदद करती है। यह पोषक तत्व शरीर में कैंसर को जन्म देने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है और कैंसर को बढ़ने से रोकती है।
  4. फोलिक का प्रमुख कार्य शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होती है और स्ट्रॉबेरी में उपस्थित पोटैशियम शरीर को हार्ट अटैक से बचाने में मदद करता है।
  5. दांतों में चमक: इसमें एसिड होता है जो कि दांत से दाग को साफ कर के उन्‍हें चमकदार बनाती है।
  6. हार्ट अटैक से बचाव: इसमें पोटैशियम होता है जो कि हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक के रिस्‍क को कम करता है।
  7. चेहरे की सुन्दरता: शोध में पाया गया है की इसका सेवन करने से चेहरे की सुन्दरता बनी रहती है। कई स्किन प्रोब्लुम्स से छुटकारा भी पाया जा सकता है।
  8. ब्लड प्रेशर में कारागार: इसमें मौजूद पोटेशियम ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार होता है।
  9. आँखों के लिए लाभदायक: इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट तत्‍व जो कि आंखों को मोतियाबिंद से बचाता है।

स्ट्राबरी के प्रकार

आपको सुनकर हैरानी हो सकती है ये जानकर की स्ट्राबेरी की 600 प्रजातियाँ विक्सकित की जा चुकी है और जो एक दुसरे से भी बहुत अलग है।

आइये जानते हैं इनमें से कुछ के बारें में

कैमारोज: यह एक कैलीफोर्निया में विकसित की गई किस्म है।

1. यह थोड़े दिन में फल देने वाली किस्म है।
2. इसका फल सबसे बड़ा व ठोस भी होता है।
3. इस फल की महक अच्छी होती है।
4. यह किस्म लंबे समय तक फल देता है।

ओसो ग्रैन्ड: यह एक कैलीफोर्निया में विकसित की गई किस्म है।

  1. जो छोटे दिनों में फल देती है।
  2. इस किस्म का फल बड़ा होता है तथा खाने व उत्पाद बनाने के लिए अच्छा होता है।
  3. इस किस्म के फलों में फटने की समस्या देखी जा सकती है।
  4. यह किस्म काफी मात्रा में रनर पैदा कर सकती है।

ओफरा: यह एक इजराईल में विकसित की गई किस्म है।

  1. यह एक अगेती किस्म है।
  2. इसका फल उत्पादन जल्दी आरंभ हो जाता है।

चैंडलर: यह एक कैलीफोर्निया में विकसित की गई किस्म है।

1. इसका उत्पादन विभिन्न स्थितियों में किया जा सकता है।
2. इसका फल आकर्षक होता है।
3 .इसकी त्वचा नाजुक होती है।
4 . इस किस्म के पौधे जल्दी फल देते हैं।
5 . इसका फल अधिक मीठा होता है।
6 .पौधे में कई फफूंद रोगों की रोधक शक्ति होती है।

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

  1. इसकी खेती के लिए कोई मिट्टी तय नहीं की गयी है।
  2. अच्छी उपज लेने के लिए बलुई दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है।
  3. इसकी खेती के लिए ph 5.0 से 6.5 तक मान वाली मिट्टी भी उपयुक्त होती है।
  4. यह फसल शीतोष्ण जलवायु वाली फसल है जिसके लिए 20 से 30 डिग्री तापमान उपयुक्त रहता है।
  5. तापमान बढ़ने पर पौधों में नुकसान होता है और उपज प्रभावित हो जाती है।

नोट: आप खेती की ज़मीन की मिटटी की जांच मात्र 700 से 800 रुपए में करा सकते हैं।

भारत में इसकी खेती

भारत में इसका उत्पादन पर्वतीय भागों में नैनीताल, देहरादून, हिमाचल प्रदेश, महाबलेश्वर, महाराष्ट्र, नीलगिरी, दार्जलिंग आदि की पहाड़ियों में व्यावसायिक तौर पर किया जा रहा है।

इसकी खेती अब मैदानी भागों दिल्ली, बेगलौर, जालंधर, मेरठ, पंजाब, हरियाणा आदि क्षेत्रों में भी की जा रही है। सोलन हल्दवानी, देहरादून, रतलाम, नासिक, गुड़गाँव स्ट्राबेरी के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

खेती के लिए पौधे कहाँ से खरीदे

  1. केएफ बायोप्लान्ट्स प्राइवेट लिमिटेड पुणे से पौधे खरीदे।
  2. हिमाचल प्रदेश से भी इसका पौधा खरीदा जा सकता है।

नोट: बाजार में इसका मूल्य 10 रूपए से लेकर 30 रूपए तक कीमत तय की गयी है।

खेत किस प्रकार तैयार करना चाहिए

  1. सितम्बर का प्रथम सप्ताह में खेत की 3 बार अच्छी जुताई करें।
  2. एक हेक्टेयर जमीन में 75 टन अच्छी सड़ी हुई खाद् अच्छे से बिखेर कर मिटटी में मिला दे।
  3. पोटाश और फास्फोरस भी मिट्टी परीक्षण के आधार पर खेत तैयार करते समय मिला  दें।

बेड कैसा होना चाहिए

  1. बेड की चौड़ाई 2 फुट रखें और बेड से बेड की दूरी डेढ़ फिट रखनी चाहिए।
  2. बेड तैयार होने के बाद उस पर ड्रेप एरिगेशन की पाइपलाइन बिछा दें।
  3. पौधे लगाने के लिए प्लास्टिक मल्चिंग में 20 से 30 सेमी की दूरी पर छेद करें।

पौधे लगाने का सही समय क्या है

  1. स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाने का सही समय 10 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक है।
  2. यदि तापमान ज्यादा हो तो पौधे सितम्बर लास्ट तक लगाना चाहिए।

सिंचाई की सही विधि क्या है

  1. पौधे लगाने के बाद तुरंत सिंचाई की जाना चाहिए।
  2. समय समय पर नमी को ध्यान में रखकर सिंचाई करना चाहिए।
  3. स्ट्रॉबेरी में फल आने से पहले सूक्ष्म फव्वारे से सिंचाई कर सकते है।
  4. फल आने के बाद टपक विधि से ही सिंचाई करें।

कीड़े से कैसे बचे

स्ट्राबेरी खेत में लगने वाले कुछ कीटाणु: कीड़े में पतंगे, मक्खियाँ चेफर, स्ट्राबेरी जड़ विविल्स झरबेरी एक प्रकार का कीड़ा रस भृग, स्ट्रॉबेरी मुकट कीट कण जैसे कीट इसको नुकसान पंहुचा सकते हैं।

कीटाणुओं से इसका बचाव

इसके लिए नीम की खल पौधों की जड़ों में डाले इसके अलावा पत्तों पर पत्ती स्पाट, ख़स्ता फफूंदी, पत्ता ब्लाइट से प्रभावित हो सकती है। इसके लिए समय समय पर पोधों के रोगों की पहचान कर विज्ञानिकों की सलाह में कीटनाशक दवाइयों का स्प्रे करते रहें।

लो टनल का उपयोग

  1. पाली हाउस नही होने की अवस्था में किसान भाई स्ट्रॉबेरी को पाले से बचाने के लिए प्लास्टिक लो टनल का उपयोग करना चाहिए।
  2. इसके लिए पारदर्शी प्लास्टिक चादर जो 100-200 माइक्रोन की हो उसका उपयोग करना चाहिए।

सरकार से मिलने वाली विशेष सहायता

  1. अलग अलग राज्यों में उद्यानिकी और कृषि विभाग की तरफ से अनुदान भी है।
  2. जिसमे प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप इरीगेशन फुवारा सिंचाई आदि यंत्र पर 40% से 50% तक अनुदान भी मिल जाता है।
  3. आप अपने राज्य के अनुसार कृषि विभाग से सहायता ले सकते हैं।

फसल की तुड़ाई का सही समय

  1. तुड़ाई का सही समय जब होता है जब फल का रंग 70% असली हो जाये तो तोड़ लेना चाहिए।
  2. आप अपने सप्लाई जगह की दूरी के अनुसार भी तोड़ सकते हैं जिससे माल पहुचते तक वो बिलकुल ताज़ा बना रहेगा यानी अगर माल दूर जाना है तो आप कम पक्का फल भी तोड़ें।
  3. तुड़वाई अलग अलग दिनों मैं करनी चाहिए।
  4. फलों को हाथ से पकड़ कर नहीं तोडना चाहिए इससे वो ख़राब भी हो सकते हैं,ऊपर से दण्डी पकड़ना चाहिए।
  5. फल सात से बारह टन प्रति हेक्टयेर निकलता है।

पैकिंग कैसी करनी चाहिए

  1. ध्यान दें की स्ट्रॉबेरी की पैकिंग प्लास्टिक की प्लेटों में करनी चाहिए।
  2. इसको हवादार जगह पर रखना चाहिए।
  3. तापमान पांच डिग्री हो व एक दिन के बाद तापमान जीरो डिग्री होना चाहिए।

स्ट्रॉबेरी का भाव, कहा और किसको बेचें

  1. बेचने के लिहाज से यह बहुत जल्दी बिक जाने वाला फल होता है क्यों की इसकी मांग अधिक है व पूर्ति कम है।
  2. ये बाज़ार में 300 से 600 रूपए तक आसानी से बिकता है इसकी खरीदार भी आपको फसल लगने के साथ ही मिल जाते हैं आप इसकी एडवांस बुकिंग भी ले सकते हैं।
  3. आपकी कुल लागत जो भी हो इससे आपको उस लागत का 3 गुना तो बहुत आसानी से मिलेगा ही।

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फोटो साभार: krishijagran

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