केवड़ा की खेती एक उम्दा पहल कमाई की ओर –

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केवड़े का छिडकाव आज कई चीजों में किया जा रहा है इसमें खाने से लेकर पीने की वस्तुओं से लेकर खुशबूदार सभी पदार्थों में बड़ी मात्रा में किया जा रहा है |केवड़े की बहुत ही सौन्दर्य प्रसाधन जैसे नहाने का सुगन्धित साबुन,बालों में लगाने वाला केश तेल,लोशन,खाद्य पदार्थ के रूप में केवड़ा जल मिठाई के लिए,सीरप,शीतल पेय दर्थों में सुगंध लिए केवड़ा जल का प्रयोग किया जाता है | सिरदर्द व गठियावात के रोगियों के लिए केवड़ा तेल किसी वरदान से कम नही है सौन्दर्य प्रसाधन जैसे नहाने का सुगन्धित साबुन,बालों में लगाने वाला केश तेल,लोशन,खाद्य पदार्थ के रूप में केवड़ा जल मिठाई के लिए,सीरप,शीतल पेय दर्थों में सुगंध लिए केवड़ा जल का प्रयोग किया जाता है | सिरदर्द व गठियावात के रोगियों के लिए केवड़ा तेल किसी वरदान से कम नही है |

इसकी खेती कहाँ की जाती है ?

केवड़े की खेती दक्षिण पूर्वी भारत से ताईवान, दक्षिणी जापान और दक्षिणी इंडोनेशिया तक फैला हुआ हैं। परन्तु भारत में यह मुख्य रूप से आंधप्रदेश, तमिलनाडु, उड़ीसा, गुजरात और अंडमान द्वीप में पाया जाता है।

केवड़े से होने वाले कुछ फायदे –

खाद्य सामग्री में उपयोग बहुत सी खाने की वस्तुओं में इसका महत्व है , कई तरह की बनने वाली मिठाइयों में इसका प्रयोग किया जाता है केवड़े के फूल से केवडा जल बनता है |स्वीट सिरप और कोल्ड ड्रिंक्स आदि में सुगंध के रूप में भी किया जाता है।  
एन्तिफंगल और बेक्टिरियलइसमें एंटीफंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जिसके कारण ये किसी भी तरह के संक्रमण को फैलने से रोकता है।
विषनाशक- केवड़े के पत्ते विषनाशक होते हैं ,इसके पत्तों का उपयोग सभी तरह के विष को समाप्त कर सकता है |
पीरियड में लाभकारी –अगर किसी महिला को सामान्य से ज्यादा रक्तस्त्राव यानि कि हेवी फ्लो की शिकायत है, तो केवड़ा की जड़ को पानी में घिसकर चीनी के साथ पीने से पीरियड में होने वाली हेवी फ्लो की परेशानी दूर होती है।
कैंसर पर कारगार कई शोधों में केवड़ा को कैंसर के इलाज में भी कारगर बताया गया है। दरअसल, केवड़ा में कुछ ऐसे एंटी ऑक्सीडेंट पाये जाते हैं जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ने में मदद करती है।
भूख पर असरदार केवड़ा भूख बढ़ाने में भी सहायक है। केवड़ा का अर्क अगर नियमित रूप से खाने में इस्तेमाल करते हैं तो भूख पहले की तुलना में अधिक बढ़ जाती है।

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु –

खेती के लिए बलुअर दोमट व दोमट भूमि उपयुक्त होती है | रेतीली, बंजर और दलदली भूमि में भी केवड़े का पौधा लगाया जा सकता है। केवड़े की खेती से अधिकाधिक उपज लेने के लिए अच्छी पैदावार के लिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ भूमि सर्वोत्तम होती है।यह समुद्र के किनारे वाले क्षेत्र में पाया जाता है। यह ज्यादातर नदी किनारे, नहर खेत और तालाबों के पास उगता है |यह उष्ण कटिबंधीय जलवायु का पौधा है।जिसकी उपज के लिए 25 से 55 डिग्री सेल्सियस का होना सही माना जाता है |

बुवाई की सही विधि –

केवड़े का पौधा कोहरा सहन नहीं कर सकता है। इसके पौधे को अधिक जल की आवश्यकता होती है।केवड़े के कलमों की रोपाई की मानसून के मौसम जून से अगस्त माह में की जाती है|इसकी खेती आप क्यारी बनाकर ही करें |इसमें कोहरा का खतरा बना रहने के कारण बहुत जादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है |केवड़े की कलम हेतु लगभग 25-35 से.मी. लंबी और 90-100  से.मी. मोटाई की शाखा की आवश्यकता होती है। किसान भाई ध्यान रखें,कलम लेने के लिए जिन शाखाओं में पुष्प नहीं लगते और पुराने तने होते है उन्हे ही चुनें | कलम लगाने के बाद क्यारियों की नियमित रुप से सिंचाई करें |कलम लगाने के 35  से 40  दिन पुरानी कलमों को उखाड़ा जाता है। फिर इन कलमों को खेत में वृक्षारोपण के माध्यम से लगाया जाता है। ठंड मौसम में शाम के समय तैयार नये पौधों की रोपाई खेतों में की जानी चाहिए | रोपाई के बाद खेत में हल्का पानी अवश्य लगाना चाहिए | जिससे जड़ें भूमि को अच्छी तरह से पकड़  लें |

सिंचाई की सही विधि –

केवड़े की खेती ज्यादातर नदियों या झरनों के किनारे ही की जाती है ,इसलिए इसको ज्यादा सिचाई की आवश्यकता नहीं होती केवल कुछ दिनों के लिए ही आप इसकी सिचाई करने के पश्चात बंद कर सकते हैं |

रोगों से इसका बचाव

लिटिल लीफ – इस खेती में लगने वाला ये एक मुख्य रोग है इसमें पत्तियों की सतह पर तेलीय पारदर्शी धब्बे बन जाते है। धब्बे बाद में सूख जाते है और पत्तियाँ गिर जाती है।नियंत्रण: इस रोग से बचाव के लिए रोपाई से पहले कलमों को केप्टन 3 ग्राम और कालफोमिन 3 मि.ली को एक लीटर पानी के घोल में आधे घंटे तक डुबोना चाहिए।

फसल की कटाई किस प्रकार करें –

फूलों की ताजगी के अनुसार छटाई की जाती है। खराब फूलों को अलग कर देना चाहिए इससे पदार्थ की गुणवता बनी रहती है |फूलों को सुबह जल्दी तोड़ा जाता है। तुड़ाई के तुरंत बाद फूलों को आसवन के लिए भेजा जाता है।सभी फूलों को कटाई के तुरंत बाद आसवन के लिए भेजा जाता है |प्रति 18 ली. केवड़ा जल के लिए लगभग 1000 फूलों का आसवन करते है।

अपना माल कहाँ बेचें

केवड़े की खेती में लाभ की पूरी ही सम्भावना होती है क्यों की ये एक दलहन फसल होने के साथ साथ नकदी फसल भी है आप अपने निकट के व्यापारियों से सम्पर्क करके भी इसे अपनी इच्छा के अनुसार बेच सकते हैं या आप चाहें तो अपनी खुद की पैकिंग देकर भी इसको बेच सकते हैं आप ऑनलाइन के माध्यम से भी सीधे इसे रिटेल अथवा होलेसले के माध्यम से बेच सकते हैं। और एक अच्छा लाभ भी कमा सकते हैं ऑनलाइन के माध्यम से आप इसे अमेज़न, फ्लिप्कार्ट, बिगबास्केट, इंडिया मार्ट जैसी कम्पनी के माध्यम से अपना माल सीधे तौर पे भी बेच सकते हैं। या अगर आप चाहें तो पुरानी दिल्ली की मशहूर खारी बावली जो की पुरे एशिया महादीप की सबसे बड़ी अनाज मंडी है वहां जाकर किसी भी व्यापारी से बातचीत करके भी अपना माल बेच सकते हैं।

आशा करते है केवड़े की खेती से जुड़ी यह लेख आपको पसंद आयी होगी। अपने किसान भाईयों को जागरूक कर स्वरोज़गार मुहैया कराने हेतु शुरुवात की गयी इस मुहीम से जुड़े रहने के लिए हमें सब्सक्राइब करना न भूले। इसी तरह की जानकारी पाने के लिए एडुफ़ीवर ग्रामीण शिक्षा को अपना सहयोग दे। अरहर के उत्पादन से जुड़ी किसी भी तरह के समस्याओं के समाधान हेतु नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना न भूले।

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