करनी है बड़े पैमाने की खेती बने मक्का उत्पादक –

मक्के की रोटी से लेकर स्वीट कॉर्न , या केलोक्स सुबह के ब्रेकफास्ट से लेकर इवनिंग के डिनर तक में मक्के ने हर रसोई में अपनी एक अलग ही अहमियत बना रखी हैं |जितना अच्छा इसका स्वाद है उतना ही अच्छा ये सेहत के लिए भी माना जाता है | इसकी पैदावार से जादा इसकी मांग हमेशा से ही बनी रहती है आप अगर चाहे तो इसकी खेती करके अपनी अछि कमाई कर सकते हैं | भारत से लेकर विदेशों तक में इसकी अपनी ही अहमियत है | ये एक लाभदायक फसल में से एक है |दुनिया भर में मक्के से बनने वाले कई तरह के व्यंजन अपने स्वाद से लेकर सेहत तक के लिए प्रसिद्ध हैं अगर आप चाहें तो अपने स्वाद के अनुसार कोई भी डिश बनायें उसमें मक्का अपनी जगह बना ही लेता है | जितना इसका स्वाद है उतना ही इससे धन लाभ भी है | वैसे तो पूरे विश्व में मक्के की सबसे अधिक पैदावार अमेरिका में होती है | पर भारत जैसे देश में जहाँ इसकी उपज कई मायने रखती है भारत में इसकी पैदावार खाने के साथ मवेशी चारे के लिए भी की जाती है |

पशुओं के चारे में इसका उपयोग –

कुछ दिन पूर्व एदुफीवर ग्रामीण शिक्षा के माध्यम से हमारी मुलाकात बिहार में स्थित मुजफ्फरपुर जिले के एक किसान भाई से हुई जिसमें हमें पता चला की मक्का पैदावार करने से पूर्व कई मवेशियों के चारे बनाने वालीकम्पनी ये आंकलन कर लेती हैं की किसान उनको इस साल कितनी उपज दे सकते हैं क्यों की ग्रामीण क्षेत्र में मविशियों का चारा बहुत अधिक मात्रा में बनता भी है और बिकता भी है | बिहार का मुजफ्फरपुर जिला इसके लिए बहुत बड़ा उत्पादन केंद्र भी है | यहाँ मक्के की खेती पशु के चारे के रूप में की जाती हैं | गर्मियों के दौरान अगर आप इस जिले से कभी गुजरेंगे तो आपको भी यहाँ सड़क के किनारे मक्के सूखते नज़र आयेंगे आप अगर गर्मियों में मुज्जफरपुर जिला में सड़क से गुजरेंगे तो आप यहाँ देख सकते हैं कितने बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है यहाँ के लोकल किसानो से बातचीत के दौरान पता चला की यहाँ पर इसकी पैदावार बहुत बड़े पैमाने पर की जाती है साथ ही यहाँ विशेष पशुपालक इसकी खेती जीविका के साथ साथ अपने पशुओं के चारे के लिए भी करते हैं |

मक्के से होने वाले कुछ फायदे –

वजन बढ़ाने में मददगार वज़न बढ़ाने के लिए आपको सही मात्रा में कैलोरी का सेवन करने की आवश्यकता होती है। मक्‍का में कार्बोहाइड्रेटऔर कैलोरी पर्याप्‍त मात्रा में पाई जाती है, जो वज़न बढ़ाने में काफी हद तक सहायक होती है। यदि आपका वजन सामान्‍य से कम है तो आप अपने आहार में आज से ही मक्‍के को शामिल करें।  
गर्भावस्था में उपयोगी शोधकर्ताओं के अनुसार आहार मे मक्का ज़रूर शामिल करना चाहिए क्‍योंकि इससे मां और बच्‍चे दोनों को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त होता है। गर्भवती महिलाओं में फोलिक एसिड की कमी के कारण होने वाले बच्‍चे का वजन कम हो सकता है। मक्के में फोलिक एसिड अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही महत्‍वपूर्ण होता है।
कैंसर से रोकथाम शोधकर्ताओं के अनुसार इसका सेवन कैंसर के प्रभाव को एंटीऑक्‍सीडेंट की सहायता से कम किया जा सकता है। कई शोध इस बात को प्रमाणित कर चुके हैं कि मक्‍का में पाये जाने वाले एंटीऑक्‍सीडेंट्स कैंसर से बचाने में मददगार होते हैं और कैंसर पैदा करने वाले मुक्‍त कणों यानि फ्री रैडिकल्स से लड़ने का काम करते हैं। इसमें मौजूद तत्‍व लिवर और स्‍तन कैंसर में विशेष रूप से उपयोगी होते हैं।
कोलेस्‍ट्राॅल कम करे स्‍वीट कॉर्न यानी मक्‍का में विटामिन सी, केरोटेनॉइड्स और बायोफ्लेवोनॉयड काफी मात्रा में होता है, जो रक्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा को कम करके रक्‍त प्रवाह को सुचारु बनाता है।
आँखों की रौशनीशोधकर्ताओं के अनुसार मक्के के आटे में विटामिन A और केरोटेनॉइड्स पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं इसलिए इसका सेवन आंखों के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

मक्के के कुछ प्रसिद्ध प्रकार

  • वीन स्त्रेता
  • कचंना
  • शाक्ति -1 आजाद उत्तम
  • नव ज्योति
  • गौरव
  • प्रगति गंगा 2 
  • गंगा 11
  • सरताज
  • पसा अगेती

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु –

मक्का उष्ण एवं आर्द जलवायु की फसल है। इसके लिए ऐसी भूमि जहां पानी का निकास अच्छा हो उपयुक्त होती है। पानी के निकास पर खास ध्यान देना पड़ेगा आपको अगर इसमें किसी तरह की कोई लापरवाही की जायेगी तो इससे आपकी फसल खराब हो सकती है |मक्के की फसल को शुरुआत के दिनों से भूमि में पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है| जमाव के लिए 18 से 23 डिग्री सेल्सियस तापमान एवं वृद्धि व विकास अवस्था में 28 डिग्री सेल्सियस तापमान उत्तम माना गया है|

खेत की तैयारी किस प्रकार करें –

खेत की तैयारी सब अपने अपने एरिया के अनुसार भी करते हैं पर एक उचित तरीका के तौर के लिए पहला पानी गिरने के बाद जून माह मे हेरो करने के बाद पाटा चला देना चाहिए। यदि गोबर के खाद का प्रयोग करना हो तो पूर्ण रूप से सड़ी हुई खाद अन्तिम जुताई के समय जमीन मे मिला दें। रबी के मौसम मे कल्टीवेटर से दो बार जुताई करने के उपरांत दो बार हैरो करना चाहिए।

बीज का उपयोग

बीजों की खरीद करते समय उसकी गुणवत्ता का विशेष ध्यान देना चाहिए ,इससे आपकी आने वाली फसल कम प्रभावित होगी |यदि आप इसकी खेती के लिए उत्तम बीजों का उपयोग करेंगे तो इससे आपकी फसल बहुत अछि तरह से फल देगी |इसकी खरीदारी करते समय आप अवश्य ही किसी मान्यता प्राप्त संसथान का ही चुनाव करें |

बुवाई की सही विधि –

बीजों की बुवाई करने से पहले आप इसको साफ़ कर लें किसी फंफूदनाशक दवा जैसे थायरम या एग्रोसेन जी.एन. 2.5-3 ग्रा./कि. बीज का दर से उपचारीत करके बोना चाहिए। एजोस्पाइरिलम या पी.एस.बी.कल्चर 5-10 ग्राम प्रति किलो बीज का उपचार करें।वर्षा प्रारंभ होने पर मक्का बोना चाहिए। सिंचाई का साधन हो तो 10 से 12 दिन पूर्व ही बोनी करनी चाहिये इससे पैदावार मे वृध्दि होती है। बीज की बुवाई मेंड़ के किनारे व उपर 3-5 से.मी. की गहराई पर करनी चाहिए। बुवाई के एक माह पश्चात मिट्टी चढ़ाने का कार्य करना चाहिए। बुवाई किसी भी विधी से की जाय परन्तु खेत मे पौधों की संख्या 50-75 हजार/हेक्टेयर रखना चाहिए।

सिंचाई की सही विधि

मक्का के फसल को पुरे फसल अवधि मे लगभग 400-600 mm पानी की आवश्यकता होती है तथा इसकी सिंचाई की महत्वपूर्ण अवस्था (Critical stages of irrigation) पुष्पन और दाने भरने का समय (Silking and cob development) है। इसके अलावा खेत मे पानी का निकासी भी अतिआवश्यक है।मक्का एक ऐसी फसल है जो न तो सूखा सहन कर सकती है और न ही अधिक पानी. अतः खेत में जल निकासी के लिए नलियां बुवाई के लिए अच्छ से तैयार करनी चाहिए और कोशिश करें कि अतिरिक्त पानी को खेत से निकाल दें. मक्का में जल प्रबंधन मुख्य रूप से मौसम पर निर्भर करता है. वर्षा ऋत में मानसूनी वर्षा सामान्य रही तो सिंची की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि भारत में 80 प्रतिशत मक्का विशेष रूप से सिंचित क्षेत्रों में उगाई जाती है. पहली सिचाई में बहुत ही ध्यान देने की आवश्यकता होती है क्योकि अधिक पानी से छओटे पौधों की पैदावार में बढ़ोतरी नहीं होती है. पहली सिंचाई में पानी मेंड़ों के ऊपर नहीं बहनी चाहिए. सिंचाई की दृष्टि से नई पौध, घुटनों तक की ऊंचाई, फूल आने और दाने भराव की अवस्थाएं सबसे ज्यादा संवेदनशील होती है|

रोगों से इसका बचाव –

तना मक्खी- तना मक्खी का प्रकोप बसंत की फसल में अधिक होता है| तने की मक्खी 3 से 4 दिन के पोधौं पर हमला कर पौधे को टेढ़ा व खोखला कर देती है|
नियंत्रण- मिट्टी को 2 से 3 मिलीलीटर फिप्रोनिल प्रति लीटर पानी की दर से भिगोएँ|
तना भेदक सुंडीतना भेदक सुंडी तने में छेद करके उसे अंदर से खाती है| जिससे गोभ एवं तना सूख जाता है|
नियंत्रण-रोकथाम हेतु बुवाई के 2 से 3 हफ्ते बाद क्वीनालफॉस 30 मिलीलीटर या क्लोरेन्ट्रानीलीप्रोल 3 से 4 मिलीलीटर या स्पीनोसेड 4 से 5 मिलीलीटर प्रति 15 लीटर पानी में छिड़कें| कार्बोफ्यूरान 3जी के 8 से 10 दाने पौधे की गोभ में बुवाई के 30 दिन बाद डालें एवं 45 दिन बाद फिर डालें|
कटुआ- कटुआ कीड़ा काले रंग की सूंडी है, जो दिन में मिट्टी में छुपती है| रात को नए पौधे मिट्टी के पास से काट देती है| रोक न करने पर पूरा नुकसान हो सकता है|
नियंत्रण-रोकथाम हेतु कटे पौधे की मिट्टी खोदे, सुंडी को बाहर निकालकर नष्ट करें एवं स्वस्थ पौधों की मिट्टी को क्लोरोपायरीफास 10 ई सी 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी से भिगोएँ| तना मक्खी की रोकथाम के उपाय से इसकी भी रोक होती है|

उपज

जब भुट्टे को ढकने वाले पत्ते पीले या भूरे होने लगे एवं दानो की नमी 30 प्रतिशत से कम हो जाए तो फसल काट लेनी चाहिए भुट्टे काटने पर पौधा हरा रहता है, उसे पशु के चारे हेतु प्रयोग करें| उपरोक्त विधि से मक्का की फसल से औसतन पैदावार सामान्य किस्म से 40 से 55 क्विंटल और संकर किस्म से 55 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टयर होनी चाहिए|

फसल का एकत्रण –

मक्का के भुट्टों को धूप में तब तक सुखाएं जब तक दाना कठोर न हो जाए व उसमे नमी 12 से 14 प्रतिशत हो जाए| फिर भुट्टों को बोरी में भरकर मंडी ले जा सकते हैं| दाने को भुट्टे से निकालने के लिए ध्यान रखें की वो इतने सूखे हो कि हाथ या थ्रेसर से गहाई करते समय उन्हें नुकसान न हो|

माल को कहाँ बेचें

आप चाहे तो मक्के को सीधा अपने बाजार में लोकल कस्टमर के बीच उतार सकते है। आप इसे रिटेल भी कर सकते हैं  एवं बेहतर डील मिलने पर व्होलसेल की दर पे भी बेच सकते हैं। इसके कई व्यापारी आपको एडवांस तक देते हैं। ये एक नकद बिकने वाली फसल है तथा देश से लेकर विदेश तक इसकी मांग लगातार भी बढ़ रही है। ऑनलाइन के इस जग में आप चाहे तो अपने मखाने की पैकेजिंग कर फ्लिपकार्ट, अमेज़न इत्यादि साइट पर भी बेच सकते है।

आशा करते है मक्के की खेती से जुडी यह लेख आपको पसंद आयी होगी। अपने किसान भाईयों को जागरूक कर स्वरोज़गार मुहैया कराने हेतु शुरुवात की गयी इस मुहीम से जुड़े रहने के लिए हमें सब्सक्राइब करना न भूले। इसी तरह की जानकारी पाने के लिए एडूफीवर ग्रामीण शिक्षा को अपना सहयोग दें । मक्के के उत्पादन से जुड़ी किसी भी तरह के समस्याओं के समाधान हेतु नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना न भूले।

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