अपना भाग्य बदलने की कला है किशमिश बनाने की सुचारू विधि –

किशमिश को आज किसी भी मोहताज की जरुरत नहीं है , आज किसी भी पूजा के प्रसाद से लेकर मेहमानों के आने वाले तोहफों में इसकी उपलब्धता देखि जा सकती है | आज हम लोग अपने बाज़ार में इसे बिक्री होते हुए खूब देख सकते है | लेकिन हम में से बहुत कम लोगों को ही पता होगा की ये किस प्रकार से बनाई जाती है | किशमिश के खाने का चलन जिस प्रकार से भारत में बढ़ता जा रहा है इससे इसके व्यापार में भी बहुत तेज़ी पकड़ ली है | ड्राई फ्रूट्स का व्यापार आज बहुत सफल व्यापार बन गया है | किशमिश की उपयोगिता ड्राई फ्रूट्स में अहम् मानी जाती है, किशमिश का व्यापार आज अपने चरम पर चल रहा है |

किशमिश खाने से होने वाले रहस्यमय फायदे –

हृदय रोग से बचावशोध कर्ताओं के अनुसार ह्रदय रोगों बचने में भी किसमिस खाने के फायदे मिलते हैं एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार किशमिश खराब कोलेस्ट्रोल यानी एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड (रक्त में मौजूद एक प्रकार का फैट) को कम कर सकती है, जिससे कोलेस्ट्रॉल की वजह से होने वाले हृदय रोग के जोखिम से बचा जा सकता है
ऊर्जावान – शोधकर्ताओं के अनुसार किशमिश को कार्बोहाइड्रेट का एक प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। यह एक्सरसाइज के दौरान ब्लड ग्लूकोज का स्तर बनाए रख सकती है, जिससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बरकरार रह सकता है। इसकी पुष्टि एनसीबीआई के वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध से होती है ऊर्जा बढ़ाने के लिए किशमिश को आहार में शामिल किया जा सकता है।
रक्तचाप पर असरदारशोधकर्ताओं का कहना है की किशमिश को सेहत के लिए फायदेमंद ड्राईफ्रूट्स में उच्च स्थान दिया गया है। किशमिश की इस कार्यप्रणाली के पीछे इसमें मौजूद खनिज काम करते हैं। जर्नल ऑफ फार्माकोग्नोसी और फाइटोकेमेस्ट्री में प्रकाशित एक शोध के अनुसार उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी ऐसा ही एक खनिज काम करता है। दरअसल, इसमें मौजूद पोटेशियम बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है और हृदय रोग के खतरे को भी कम करने में भी मददगार हो सकता है |
मधुमेह पर कारागार –शोधकताओं के अनुसार माना जाता है कि किसमिस की ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होती है,  जिसके कारण यह इंसुलिन रिस्पांस को बेहतर करने में मदद कर सकती है, जिससे मधुमेह नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है । बता दें कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक मापक होता है, जो यह बताता है कि खाद्य पदार्थ (कार्बोहाइड्रेट युक्त) कितनी तेजी से ब्लड शुगर (ग्लूकोज) को बढ़ा रहा है। बता दें कि कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं |
एंटीबेक्टिरियल गुण शोध कर रहे विद्वानों का मानना है की इसमें कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह के संक्रमण से बचाने में सहायक हो सकते हैं, जैसे एंटीमाइक्रोबियल और एंटीबैक्टीरियल। इसके अलावा, किशमिश का अर्क ओरल बैक्टीरिया, म्यूटन्स स्ट्रैपटोकोकस (दांत टूटने का कारण बनने वाला मुख्य बैक्टीरिया) से लड़कर मुंह को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकता है |

किशमिश में मिलने वाले तत्व –


मात्रा
 प्रति 100 ग्राम
पानी15.43 ग्राम
ऊर्जा299 kcal
प्रोटीन3.07 ग्राम
फैट0.46 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट79.18 ग्राम
फाइबर3.7 ग्राम
शुगर59.19 ग्राम
मिनरल
कैल्शियम50 मिलीग्राम
आयरन1.88 मिलीग्राम
मैग्नीशियम32 मिलीग्राम
फास्फोरस101 मिलीग्राम
पोटेशियम749 मिलीग्राम
सोडियम11 मिलीग्राम
जिंक0.22 मिलीग्राम
कॉपर0.318 मिलीग्राम
सिलेनियम0.6 माइक्रोग्राम
विटामिन
विटामिन-सी2.3 मिलीग्राम
थियामिन0.106 मिलीग्राम
राइबोफ्लेविन0.125 मिलीग्राम
नियासिन0.766 मिलीग्राम
विटामिन-बी 60.174 मिलीग्राम
फोलेट5 माइक्रोग्राम
कोलिन11.1 मिलीग्राम
विटामिन-ई0.12 मिलीग्राम
विटामिन-के3.5 मिक्रोग्राम
लिपिड
फैटी एसिड टोटल सैचुरेटेड0.058 ग्राम
फैटी एसिड टोटल मोनोअनसैचुरेटेड0.051 ग्राम
फैटी एसिड टोटल पॉलीअनसैचुरेटेड0.037 ग्राम

किशमिश के विशेष प्रकार –

भूरी किशमिश – यह किशमिश अंगूरों को तीन हफ्तों तक सुखाकर बनाई जाती है। सूखने के बाद इनका रंग भूरा हो सकता है। अलग-अलग जगहों पर इसे बनाने के लिए विभिन्न तरह के अंगूरों का इस्तेमाल किया जाता है। इनका रंग, आकार और स्वाद अंगूर के प्रकार पर निर्भर करता है।
सुल्ताना (गोल्डन किशमिश)यह किशमिश सुल्ताना अंगूर (बीज रहित हरे गोल अंगूर) को सुखाकर बनाई जाती है। इस प्रकार की किशमिश को बनाने के लिए सुखाने से पहले अंगूर को एक तरह के तैलीय सलूशन में भिगोया जाता है। इस कारण इस किशमिश का रंग गोल्डन/हल्का भूरा होता है। बाकी दो किशमिश की तुलना में इस किशमिश का आकार अक्सर छोटा और स्वाद मीठा होता है|
करंट (काली किशमिश) इस प्रकार की किशमिश को जांटे करंट भी कहा जाता है और इन्हें काले अंगूर से बनाया जाता है। इन्हें भी अंगूर को तीन हफ्तों तक सुखाकर बनाया जाता है। इनका स्वाद अक्सर खट्टा-मीठा और आकर छोटा होता है। अन्य अंगूर की तरह ब्लैक किशमिश खाने का फायदा क्या है, इस बारे में आगे विस्तार से बताया गया है।

किशमिश बनाने की सुचारू विधि –

किशमिश बनानेवाले सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें की आपको इसको बनाने में मेहनत भी करनी पड़ेगी और सफाई से काम भी करना पड़ेगा | सर्प्रथम आप उच्च श्रेणि के अंगूरों का ही चुनाव करें ताकि आपकी किशमिश की गुणवत्ता का विशेष ख़याल रखा जा सके |इसको बनाने के लिए आप इसकी सही मात्रा का चुनाव कर लें ताकि आपको किसी भी तरह की कोई समस्या का सामना ना करना पड़े उदहारण के तौर पे हम अंगूर को गुच्छे से अलग कर लें अगर कोई अंगूर खराब हो तो उसको निकाल दें वरना ये आपकी किशमिश खराब कर देगा।एक पैन में दो गिलास पानी उबलने के लिए रख दें जब पानी में उबाल आ जाएँ तो अंगूर को पानी में डाल दें। अंगूर को पांच मिनट उबालें या जैसे ही अंगूर ऊपर तैरने लगे तो इन्हें निकाल लें चार से पांच मिनट में अंगूर उबलकर ऊपर आ जाएँगे और इनमे क्रेक भी आ गया है। हमारे सभी अंगूर बीच से फट गये है गैस को बंद कर दें और अंगूर को छलनी में छान लें इन्हें थोड़ी देर के लिए पंखे में रख दें।जब अंगूर का सारा पानी निकल जाएँ तो एक बास्किट लें और उसके ऊपर सूती पकड़ा फैला दें। अगर आपके पास बास्किट नहीं है तो पलंग पर फैला दें। इन्हें किसी प्लेट या बर्तन में ना सुखाएं नहीं तो आपकी किशमिश खराब भी हो सकती है।बास्किट नीचे जमीन पर टिका हुआ ना हो बास्किट के थोड़े से पाएं होने चाहिए क्योकि नीचे से हवा लगनी बहुत ज़रूरी है।अंगूर के एक-एक पीस को अलग-अलग फैला दें अब अंगूर को तीन से चार दिन की धूप लगाएं। मई-जून के महीने में दो दिन की धूप ही काफी है। लेकिन और किसी मौसम में आप तीन से चार दिन की धूप लगाएं। शाम को अंगूर को पंखे में नीचे रख दें तीन से चार दिन में आपकी किशमिश बनकर तैयार हो जाएगी।जितना बड़ा हमारा अंगूर था किशमिश भी उतनी ही बड़ी बनकर तैयार हुई है। कुछ बातों का ध्यान रखकर आप बहुत अच्छी किशमिश घर पर बना सकते है। दो किलो अंगूर में आपकी आधा किलो किशमिश बनकर तैयार होंगी।इसमें आपको ज्यादा फायदा तो नहीं होगा लेकिन अगर आपके घर ज्यादा अंगूर है या अंगूर सस्ते बिक रहे है तो आप किशमिश ज़रूर बनाएं सबसे अच्छी बात आपको घर पर किशमिश बनानी आ जाएगी| भविष्य में यदि आप इसको व्यापार के रूप में अपनाना चाहें तो आप इसी विधि से इसकी मात्रा को पढ़ा सकते हैं |

किशमिश का रखरखाव सुचारू रूप से किस प्रकार करें –

वैसे तो आप इसे कई चीज़ों में रख सकते हैं पर इनमे से बेहतर विकल्प लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे एक हवाबंद डिब्बे में फ्रिज में रखा जा सकता है। इस तरह से किशमिश को लगभग एक साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसे रखते समय इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि डिब्बे में नमी न हो। नमी रह जाने से किशमिश के सड़ने के आशंका बढ़ जाती है।

किशमिश बनने का कुल आंकलन –

आपको अपनी जानकारी के लिए मालुम होना चाहिए की इसमें प्रति किलो अंगूर में लगभग कितना किशमिश बनाया जा सकता है | इसकी गणना अंगूर की गुणवता पर निर्भर करेगी आप जिस गुणवत्ता के अंगूर का चयन इसके लिए करेंगे उसी प्रकार से आपको इससे लाभ भी मिलेगा उत्तम क्वालिटी के अंगूर से आप प्रतिकिलो में लगभग 350 ग्राम तक किशमिश का उत्पादन कर सकते हैं परन्तु यदि इसमें कुछ हल्के अंगूर का इस्तेमाल होता है तो ये घट कर 250 ग्राम रह जाती है |

अपना माल कहाँ बेचें –

किशमिश बनांने की विधि में लाभ की पूरी ही सम्भावना होती है क्यों की ये एक ख़ास ड्राईफ्रूट्स है आप अपने निकट के व्यापारियों से सम्पर्क करके भी इसे अपनी इच्छा के अनुसार बेच सकते हैं या आप चाहें तो अपनी खुद की पैकिंग देकर भी इसको बेच सकते हैं आप ऑनलाइन के माध्यम से भी सीधे इसे रिटेल अथवा होलेसले के माध्यम से बेच सकते हैं। और एक अच्छा लाभ भी कमा सकते हैं ऑनलाइन के माध्यम से आप इसे अमेज़न, फ्लिप्कार्ट, बिगबास्केट, इंडिया मार्ट जैसी कम्पनी के माध्यम से अपना माल सीधे तौर पे भी बेच सकते हैं। या अगर आप चाहें तो पुरानी दिल्ली की मशहूर खारी बावली जो की पुरे एशिया महादीप की सबसे बड़ी अनाज मंडी है वहां जाकर किसी भी व्यापारी से बातचीत करके भी अपना माल बेच सकते हैं।

आशा करते है किशमिश बनाने की विधि  से जुड़ी यह लेख आपको पसंद आयी होगी। अपने किसान भाईयों को जागरूक कर स्वरोज़गार मुहैया कराने हेतु शुरुवात की गयी इस मुहीम से जुड़े रहने के लिए हमें सब्सक्राइब करना न भूले। इसी तरह की जानकारी पाने के लिए एडुफ़ीवर ग्रामीण शिक्षा को अपना सहयोग दे। किशमिश के उत्पादन से जुड़ी किसी भी तरह के समस्याओं के समाधान हेतु नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना न भूले।

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