दालचीनी की खेती: कैसे करे इसका उत्पादन जिनसे कमाए लाखों का मुनाफा

दालचीनी की खेती: मसालों की उपयोगिता में दालचीनी का अपना ही एक महत्व है। आज हमारी रसोई बिना इस मसाले के फीकी है। आज दालचीनी ने हर व्यंजन में अपना एक अलग ही स्थान बना लिया है। बात चाहे शाकाहारी हो या माँसाहारी व्यंजन की, बिना दालचीनी के वह स्वाद कहाँ? इन्ही सब कारणों के वजह से बाजार में दालचीनी के मांग में खासा बढ़ोतरी हुयी है। इस लेख में हम आज दालचीनी की खेती (cinnamon) से जुड़ी जानकारियों के साथ दालचीनी के बारे में, इस्की बिक्री, संग्रह, उसके रख-रखाव एवं बाजार में बेचना और कैसे मुनाफा कमाए के बारे में बात करेंगे।

क्या है इसका पूरा इतिहास ?

इसकी खोज के बारे में दावा किया जाता है की इसकी खोज हिब्रू बाइबिल मसाले का विशेष उल्लेख कई बार करता है। पहली बार जब मूसा दोनों मिठाई (हिब्रू: קִנָּמוֹן qinnāmôn) दालचीनी का उपयोग करने की आज्ञा है और पवित्र अभिषेक तेल में कैसिया, नीतिवचन जहां प्रेमी बिस्तर लोहबान के साथ सुगंधित किया जाता है में एक दस्तावर औषधि और दालचीनी और सुलैमान के गीत, एक गीत अपनी प्रेयसी, दालचीनी scents के सौंदर्य का वर्णन में लेबनान की गंध की तरह उसके कपड़ों दालचीनी Ketoret जो जब जिक्र करने के लिए प्रयोग किया जाता है के एक घटक था। पवित्रा धूप हिब्रू बाइबल और  तल्मूड में वर्णित है। दालचीनी सिन्नेमोमम ज़ाइलैनिकम ब्राइन (Cinnamomum zeylanicum Breyn) नामक पेड़ की छाल का नाम है जिसे अंग्रेजी में ‘कैशिया बार्क‘ का वृक्ष कहा जाता है। यह सदाबहार पेड़ लौरेसिई वंश की अन्य प्रमुख प्रजातियों के पेड़ों के समान श्रीलंका, भारत, पूर्वी द्वीप तथा चीन में इसे उगाया जाता है।

नोटदालचीनी दक्षिण भारत का एक प्रमुख वृक्ष है। इस वृक्ष की छाल को औषधि और मसालों के रूप में प्रयोग किया जाता है। दालचीनी एक छोटा सदाबहार पेड़ होता है, जो कि 10–15 मीटर (32.8–49.2 फीट) ऊँचा होता है। दालचीनी के पेड़ अधिकतर श्रीलंका और दक्षिण भारत  में पाये जाते हैं।

दाल चीनी खाने से होने वाले कुछ अदभुद फायदे

  • कैंसर होने पर भी दालचीनी फायदेमंद है। जापान और आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने आमाषय और बोन कैंसर की बढ़़ी हुई स्थिति को दालचीनी और शहद का उपयोग करके इसे पूरी तरह काबू किया जा सकता है। कैंसर के रोगियों को एक बड़ा चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी के पावडर को गरम पानी के साथ एक महीने तक लेने से आराम मिलता है।
  • इसमें उपस्थित पोलीफेनॉल (पदार्थ) में एंटीऑक्स‍िडेंट होता है जो की इसे को सुपरफूड का दर्जा दिलाता है।
  • इसका सेवन करने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्र‍िग्लीसेराइड्स का स्तर कम होता है जिससे उच्च वसायुक्त भोजन का प्रभाव कम हो जाता है।
  • इसका सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इसकी वजह से संक्रामक रोगों का खतरा कम हो जाता है।
  • इसके तेल का प्रयोग दर्द, घाव और सूजन को समाप्त करने के लिए किया जाता है। इसके तेल से त्वचा की खुजली को भी खत्म करने के साथ, दांतों के दर्द में भी राहत देती है।
  • मुंह की बदबू पर भी असरदार साबित होती है दालचीनी को मुंह में रखकर चूसना काफी फायदेमंद साबित होता है।
  • सर्दी जुकाम या गले की विभिन्न समस्या पर भी ये बहुत लाभकारी साबित होती है। इसके प्रतिदिन सेवन से आप सर्दी लगने जैसी समस्या से भी निजात पा सकते हैं।

दालचीनी के सेवन से होने वाले कुछ नुक्सान

  • खाने में यदि इस हर्बल मसाले का अधिक उपयोग करेंगे तो इससे सांस की समस्या पैदाहोने का दर हो सकता है। इसलिए इसका अधिक मात्रा में प्रयोग करने से बचें।
  • गर्भवती महिलाओं को इसके सेवन से दूर ही रखना चाहिए इससे डिलीवरी के समय में समस्या आ सकती है।
  • शोध कर्ताओं के अनुसार पता चलता है की इसका उपभोग अत्यधिक मात्रा में करने से किडनी पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

दाल चीनी में मिलने वाले तत्व

कलोरी प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट डाइटरी फाइबर शुगर फैट कोलेस्ट्रोल सोडियम
6 0 2 ग्राम 1 ग्राम 0 ग्राम 0 ग्राम 0 मिली ग्राम 0 मिली ग्राम

दाल चीनी की किस्में

भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कालीकट ने उच्च गुणवत्ता और अधिक पैदावार देने वाली दालचीनी की दो किस्में विकसित की हैं, जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पैदा की जा सकती है- नवश्री और नित्यश्री। इन किस्मों की उत्पादन क्षमता क्रमशः 56 और 54 कि.ग्रा. सूखी छाल (Dry Quills) हेक्टेयर प्रति वर्ष है। नवश्री से 2.7% छाल का तेल, छाल में 73% सिन्नमेल्डिहाइड, 8% छाल ओलियोरेसिन, 2.8% पत्तों का तेल और पत्तों से 62% यूजिलोन प्राप्त हुआ। जबकि नित्यश्री से 2.7% छाल का तेल, छाल में 58% सिन्नमेल्डिहाइड 10% छाल ओलियोरेजिन, 3% पत्तों का तेल और पत्तों से 78% यूजिलोन का उत्पादन होता है।

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

दालचीनी की खेती के लिए जलवायु परिस्थितियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए अनुकूल है। इसके बारे में 1,000 m की ऊंचाई पर अच्छी तरह से बढ़ता है और 200-250 cm की वार्षिक वर्षा इसकी खेती के लिए आदर्श है। दालचीनी व्यावसायिक रूप से एक वर्षा आधारित फसल के रूप में खेती की जाती है।

खेत की तैयारी कैसे करनी चाहिए

खेती के लिए मिटटी की उपयोगिता बहुत जरुरी होती है। दालचीनी रेतीले दोमट मिट्टी के लिए पोषक तत्व अमीर बलुई मिट्टी से लेकर मिट्टी की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए अनुकूल है। दालचीनी की खेती में वर्ष में दो निराई, जून-जुलाई और अक्तूबर-नवंबर में करनी चाहिए तथा अगस्त सितम्बर में एक बार बौधों के चारों ओर भूमि की गुड़ाई भी करनी चाहिए। प्रथम वर्ष में 20 ग्राम नाइट्रोजन, 18 ग्राम फास्फोरस और 25 ग्राम पोटाश का प्रयोग करना चाहिए। जब पौधे दस साल के या उससे अधिक हो जाते हैं, तब 200 ग्राम नाइट्रोजन, 180 ग्राम फोसफोरस और 200 ग्राम पोटाश का प्रयोग करना चाहिए। उर्वरकों का प्रयोग दो समान मात्राओं में मई-जून और  सितंबर-अक्तूबर में करना चाहिए। गर्मी के मौसम में हरे पत्तों (25 कि.ग्रा.) से पलवार करने की और मई-जून में 25 कि.ग्रा. गोबर की खाद के प्रयोग के लिए सिफारिश कर रहा हु।

बुवाई की सही विधि

इसकी खेती करने के लिए बीज को पौधा बनाकर तैयार किया जाता है फिर उसको खेत में रोपा जाता है। मिटटी को क्यारी बनाकर खेती की जाती है खेत को इस तरह से तैयार करें की जल जमाव न हो सके।

सिंचाई कैसे करें

इसकी खेती एक वर्षा आधारित फसल है। लेकिन 180 cm से 220 cm की वार्षिक वर्षा आदर्श है। प्रारंभिक 2-3 वर्षों में, पानी एक सप्ताह में दोबार गर्मियों के महीनों के दौरान दिया जाता है। पानी की मात्रा पौधों की मिट्टी की नमी का स्तर और विकास पर निर्भर करता है। इसमें प्रतिदिन आपको निरिक्षण भी करना होगा की लगाया गया पौधा मिटटी की नमी से पोसकतात्र प्राप्त कर पा रहा हैं की नहीं।

रोगों से इसका बचाव

  • पत्र दाग: पत्र-दाग एवं डाई-बैक का कारण कोलेट्टोट्राइकम ग्लोइयोस्पोरियोडस (Colletotrichum gloeisporioides) है। पत्तों पर भूरे रंग के छोटे गहरे धब्बे दिखाई पड़ते हैं, जो बाद में आपस में मिल जाते हैं कभी कभी इस रोग से पत्तों में छिद्र हो जाते हैं और बाद में पूरा पत्ता रोग ग्रस्त हो जाता है तथा रोग तने तक फैल जाता है और पूरा पौधा सूख जाता है। रोग ग्रस्त शाखाओं की कटाई और 1% बोर्डो मिश्रण के छिड़काव से इस रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है।
  • चित्ती रोग: डिप्लोडिया स्पी. (Diplodia sp.) फफूँद के कारण पौध में चित्ती रोग होता है। यह रोग पौधशाला में ही पौध के तने पर दिखाई देता है। भूरे रंग के धब्बे फफूँद के कारण होते हैं, जो पौध के तने के चारों ओर घेरा बनाते हैं। परिणाम स्वरूप पौध मर जाती है। 1% बोर्डो मिश्रण के छिड़काव से इस रोग की रोकथान की जा सकती है।
  • पत्तियों में सुरंग: बरसात में इसको कीटों से अतिआवश्यक बचाव करना पड़ता है क्यों की बरसात में इसमें एक विशेष कीट लगता है जो की इसकी पत्तियों में सुराग बनाने का काम करता है इसलिए कोशिश करनी चाहिए की इससे बचाव हो सके।

फसल की कटाई

पौधे जब 12 से 15 मीटर तक ऊँचे हो जाते हैं तब इसकी कटाई का सही समय आ जाता है। पोधे की छाल को तोड़कर एकत्रित कर लिया जाता है बाद में उसको एकत्रित करके आप अपने अनुसार बेच सकते हैं। आप मंडी में भी इसको सप्लाई कर सकते हैं।

माल की बिक्री कहा करें

माल को चाहें तो साबुत तरीके से भी बेच सकते हैं नहीं तो आप पाउडर बनाकर भी बेच सकते हैं। साबुत की मांग बहुत अधिक की जाती है। आप इससे अपने नजदीकी मसाला मंडी से जाकर संपर्क कर सकते हैं नहीं तो आप राज्य की मंडी से जाकर भी संपर्क कर सकते हैं। आप चाहें तो ऑनलाइन के माध्यम से भी इसको बेच सकते हैं–अमेज़न, फ्लिप्कार्ट, इंडिया मार्ट इसके मुख्यत उदहारण हैं। आप इसको दोनों तरीके से चाहे पाउडर या चाहे साबुत जैसे चाहे आप इसे बेच सकते हैं।

आशा करते है दालचीनी से जुड़ी यह लेख आपको पसंद आयी होगी। अपने किसान भाईयों को जागरूक कर स्वरोज़गार मुहैया कराने हेतु की शुरुवात की गयी इस मुहीम से जुड़े रहने के लिए हमें सब्सक्राइब करना न भूले। इसी तरह की जानकारी पाने के लिए  एडुफ़ीवर ग्रामीण शिक्षा को अपना सहयोग दें। दालचीनी के उत्पादन से जुड़ी किसी भी तरह के समस्याओं के समाधान हेतु नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना न भूले।

दालचीनी से जुड़े कुछ सामान्य प्रश्न

प्रश्न: थायराइड में दालचीनी के क्या फायदे होते हैं?

उत्तर: चूना शहद, हल्दी दालचीनी का लेप लगाने से थायराइड में बहुत फ़ायदा होता है।

प्रश्न:चूना शहद, हल्दी दालचीनी का लेप घुटनों के दर्द में घुटने पर लगाने का क्या फायदा या नुकसान है?

उत्तर: हाँ फ़ायदा होता है।

प्रश्न: दालचीनी को गुजराती मे कया कहते है?

उत्तर: તજ

फ़ोटो साभार: lifehealth

क्या अपने मन में ऊपर लिखे आलेख से जुड़े कोई सवाल है? अपना सवाल यहाँ पूछें, नोट: सवाल विस्तार से लिखें

3 thoughts on “दालचीनी की खेती: कैसे करे इसका उत्पादन जिनसे कमाए लाखों का मुनाफा”

Leave a comment below or Join Edufever forum