ब्राह्मी एक बहुउपयोगी औषधीय खेती, इसका आंकलन ,एवं बाज़ार व्यवस्था ,

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ब्राह्मी एक मूल्यवान बहुउपयोगी औषधि है जो बहुत बड़े पैमाने पर उगाई जाती है| इसका नाम इसमें मौजूद गुणकारी होने वाली वनस्पति के आधार पर है मिलता है ,इसका बानस्पतिक नाम बैकोपा मोनिएरी है और यह सक्रोफुलेरीएसी  प्रजाति से संबंध रखती है |यह आमतौर पर गर्म और नमी वाले क्षेत्रों में पायी जाती है| इसका उपयोग इसके प्रतेक भाग में उपस्थित गुणों के आधार पर किया जाता है, इसमें मौजूद प्रतेक भाग दवाई बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है| इसकी औसतन लम्बाई 2 से 3 फुट तक होती है |

इससे होने वाले कुछ अदभुत फायदे ?

अल्जाइमर पर असरदारब्राह्मी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी व एंटीकॉन्वेलसेंट गुण हाेते हैं। ये गुण मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार करते हैं, साथ ही मिर्गी, अनिद्रा और चिंता को दूर करने में कारगर हो सकते हैं। इसके अलावा, ब्राह्मी में मौजूद ये गुण अल्जाइमर की बीमारी को भी दूर करने में सक्षम होते हैं|
चिंता दूर करने में कारगार –ब्राह्मी के गुणों में ये भी एक लाभकारी गुण है जिससे ये चिंता को दूर करने में भी हमारे लिए सहायक होता है | ब्राह्मी जड़ी-बूटी चिंता और तनाव को कम  कर सकती है। ब्राह्मी को एक एडाप्टोजेनिक जड़ी-बूटी माना जाता है जिसे कारण यह शरीर के तनाव को दूर करने में कारगर साबित होती है |
कैंसर पर असरदारब्राह्मी जड़ी बूटी में गुणकारी एंटीकैंसर गुण होते हैं। इस कारण से यह मस्तिष्क के ट्यूमर की कोशिकाओं को मारने के साथ ही स्तन कैंसर और कोलन कैंसर की हानिकारक कोशिकाओं के विकास को रोकने के लिए सहायक हो सकती है|
रोग प्रतिरोधक –ब्राह्मी का सेवन करने से शरीर को मजबूती तो मिलती ही है, साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट गुण के कारण रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बेहतर होती है। इस कारण शरीर विभिन्न प्रकार की बीमारियों का सामना कर सकता है , और हमारे शरीर को भिनः भिनः रोगों से बचा सकता है |
बालों के लिए वरदान –बालों के लिए ब्राह्मी एक वरदान साबित हुआ है , इसके तेल का उपयोग करने से बालों की समस्या जड़ से समाप्त होती है | इसके उपयोग से आप प्रतिदिन अपने बालों को टूटने से बचा सकते हैं , इसके प्रयोग से आपके बाल मजबूत बने रहते हैं |

ब्राह्मी के प्रकार

प्रज्ञाशक्तियह किस्म सी आई एम ए पी, लखनऊ की तरफ से तैयार की गई है। इस किस्म में 1.8-2 प्रतिशत बैकोसाइड होता है और यह ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों के लिए प्रयोग की जाती है।
सुबोधकइस किस्म को भी सी आई एम ए पी, लखनऊ की तरफ से तैयार किया गया है। इस किस्म में 1.8-2 प्रतिशत बैकोसाइड होता है और यह ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों के लिए प्रयोग की जाती है।

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

  • इसकी खेती के लिए तापमान गर्मियों में क्रमशः – 33 से 40 डिग्री के बीच होनी चाहिए सर्दियों में 10 डिग्री तक होनी चाहिए|
  • इसकी खेती वर्षा में भी कारगार होती है |इसकी खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु को उत्तम मान गया है |

खेत की तैयारी कैसे करें –

  • खेती के लिए, भुरभुरी और समतल मिट्टी की जरूरत होती है।
  • मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा बनाने के लिए, खेत को जोतें और फिर हैरों का प्रयोग करें।
  • जब ज़मीन को प्लाटों में बदल दिया जाये तो तुरंत सिंचाई करें। जोताई करते समय लगभग 17 से 18 क्विंटल रूड़ी की खाद डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
  • जुताई होने के पश्चात मिटटी में पानी डालकर उसे सूखने दें उसके बाद कुछ दिनों के पश्चात दोबारा से उसमें जोताई करें |

बीज का उपयोग

बीजों की खरीद अछि गुणवत्ता से करें आप बीज सरकारी बीज भण्डार केंद्र या फिर किसी भी निजी दूकान जो की सरककर द्वारा मान्यता प्राप्त हो उससे कर सकते हैं |खरीदने के पश्चात आप इसके बीजों को लगभग 24 घंटों तक पानी में भिगोकर रखें |इसकी बिजाई मध्य जून या जुलाई महीने के शुरू में कर लेनी चाहिए।

1.बीजाई पनीरी लगाकर ही करें और पौधों के बीच में 20×20 की दूरी अवश्य रखें |

2.एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए लगभग 25000 कटे हिस्सों की जरूरत होती है।

बुवाई करने की सही विधि –

इसकी बुवाई पौध रोपण के रूप में की जाती है |जिसमें पनीरी के माध्यम से इसमें बुवाई जी जाती है |

सिंचाई कैसे करें –

यह मुख्यत वर्षा ऋतु की फसल है, इसलिए इसे वर्षा ऋतु खत्म होने के बाद तुरंत पानी की आवश्यकता होती है। सर्दियों में 20 और गर्मियों में 15 दिनों के फासले पर सिंचाई करें।

रोगों से बचाव

घास का टिड्डा– यह कीट हरे पौधे खाते हैं। यह पत्तों और पौधे के हिस्सों को नष्ट कर देते हैं।
इसकी रोकथाम के लिए नुवोक्रोन 0.2 % या नीम से बने कीटनाशकों की स्प्रे करें|

उपज और पैदावार

  • पनीरी लगाने के 5-6 महीने बाद पौधा उपज देनी शुरू कर देता है।
  • इसकी कटाई अक्तूबर-नवंबर महीने में की जाती है।
  • कटाई के लिए पौधे का जड़ से ऊपर वाला हिस्सा जो कि 4-5 सैं.मी. होता है, को काटा जाता है।
  • एक वर्ष में 2-3 कटाई की जा सकती है।

माल को कहाँ बेचें –

आप चाहे तो अपने ब्राह्मी को बाजार में लोकल कस्टमर के बीच उतार सकते है। आप इसे रिटेल भी कर सकते हैं  एवं बेहतर डील मिलने पर व्होलसेल की दर पे भी बेच सकते हैं। इसके कई व्यापारी आपको एडवांस तक देते हैं। ये एक नकद बिकने वाली फसल है तथा देश से लेकर विदेश तक इसकी मांग लगातार भी बढ़ रही है। ऑनलाइन के इस जग में आप चाहे तो अपने माल की पैकेजिंग कर फ्लिपकार्ट, अमेज़न इत्यादि साइट पर भी बेच सकते है।

आशा करते है ब्राह्मी की खेती से जुडी यह लेख आपको पसंद आयी होगी। अपने किसान भाईयों को जागरूक कर स्वरोज़गार मुहैया कराने हेतु शुरुवात की गयी इस मुहीम से जुड़े रहने के लिए हमें सब्सक्राइब करना न भूले। इसी तरह की जानकारी पाने के लिए ग्रामीण शिक्षा  को अपना सहयोग दे। ब्राह्मी के उत्पादन से जुड़ी किसी भी तरह के समस्याओं के समाधान हेतु नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना न भूले।

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