अश्वगंधा की चमत्कारिक खेती , उसका व्यापार एवं लाभ

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अश्वगंधा की खेती एक महत्वपूर्ण खेती मानी जाती है , अश्वगंधा भारत की एक औषधिय फसल है , केवल ठन्डे प्रदेशों को छोड़कर ले लगभग भारत के कई हिस्सों में उगाई जाने वाली फसल है | किसान के लिए भी यह लाभकारी फसल है क्यों की यह एक नकदी फसल है | भारत में इसकी खेती मध्यप्रदेश के पश्चिमी भाग में मंदसौर, नीमच, मनासा, जावद, भानपुरा तहसील में व निकटवर्ती राज्य राजस्थान के नांगौर जिले में होती है। नागौरी अश्वगंधा की बाजार में एक अलग पहचान है। इस समय देश में अश्वगंधा की खेती लगभग 5000 हेक्टेयर में की जाती है जिसमें कुल 1600 टन प्रति वर्ष उत्पादन होता है जबकि इसकी मांग 7000 टन प्रति वर्ष है।

अश्वगंधा से होने वाले फायदे

डायबिटीज़ पर असरदार-अश्वगंधा से डायबिटीज कम होती है। ये आपका ब्लड शुगर स्तर 12% कम कर देता है। अगर आप पहले से ही डायबिटीज की दवाइयां ले रहे हैं तो उसके साथ अश्वगंधा ना लें क्यूंकि इससे आपका ब्लड शुगर स्तर सामान्य से भी नीचे गिर जायेगा। 
बीपी पर असरदार अगर आप हाई बीपी कम करने के लिए दवाइयां ले रहे हैं तो ध्यान रखें कि उनके साथ आप अश्वगंधा ना लें। ऐसा ना करने से आपका बीपी बहुत कम हो सकता है।
थाइराइड में मददगारअश्वगंधा को सही मात्रा में लेने से आपका थाइरोइड संतुलित हो जाता है और आपका चयापचय भी सही हो जाता है। परन्तु अगर आप पहले से थाइरोइड की दवाइयां ले रहे हैं तो अश्वगंधा ना लें चाहे वो हाइपरथाइरोइडिज़्म के लिए हो या हाइपोथयरॉइडिज़्म के लिए।
नींद की दावा अश्वगंधा शरीर में नींद लाने और ऊर्जा बढ़ाने का कार्य करता है। वो इन दवाइयों का असर बढ़ा भी सकता है और कम भी कर सकता है। मुख्य रूप से बेंज़ोडियाज़पीन लेते समय ध्यान रखें। याद रखें कि अश्वगंधा कोई नींद लाने की दवा नहीं है। 
घाव पर असरदार – इसमें मौजूद गुणों अनुसार ये घाव पर भी बहुत असरदार साबित होता है |

खेती के लिए उपयुक्त जलवायु –

 खरीफ (गर्मी) के मौसम में वर्षा शुरू होने के समय लगाया जाता है। अच्छी फसल के लिए जमीन में अच्छी नमी व मौसम शुष्क होना चाहिए। फसल सिंचित व असिंचित दोनों दशाओं में की जा सकती है। रबी के मौसम में यदि वर्षा हो जाए तो फसल में गुणात्मक सुधार हो जाता है। इसकी खेती सभी प्रकार की जमीन में की जा सकती है। केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल में किए गए परीक्षणों से पता चला है कि इसकी खेती लवणीय पानी से भी की जा सकती है।

कैसे तैयार करें अपना खेत –       

वर्षा होने से पहले खेत की कम से कम 2 बार जुताई कर लें। बुआई के समय मिट्‌टी को भुरभुरी बना दें। बुआई के समय वर्षा न हो रही हो तथा बीजों में अकुंरण के लिए पर्याप्त नमी हो। वर्षा पर आधारित फसल को छिटकवां विधि से भी बोया जा सकता है।    

बीज का उपयोग कैसे करें –             

  • बीज खरीदने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी एकत्रित कर लें।
  • बीज एवं खाद सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थान से ही लें।बीज को खरीदने से पहले उसकी गुद्वात्ता का विशेष ध्यान दें चाहिए |
  • बीज को साफ़ कर लें ,उसके पश्चात कुछ समय के लिए इसे खुली हवा में रहने दें |बुवाई से पहले बीज को पानी में लगभग 24 घंटों तक भीगो दें उसके पश्चात ही बुवाई की जानी चाहिए |

बुवाई का सही तरीका

  *अश्वगंधा की फसल को सीधे खेत में बीज द्वारा अथवा नर्सरी द्वारा रोपण करके उगाया जा सकता है।

*नर्सरी तैयार करने के लिए जून-जुलाई में बिजाई करनी चाहिए।

*एक हेक्टेयर के लिए 5 किलो बीज की नर्सरी उपयुक्त होगी।

*बोने से पहले बीजों को थीरम या डाइथेन एम-45 से 3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित कर लेना चाहिए। ऐसा करने से अकुंर बीज जनित रोगों से सुरक्षित रहते है। बीज 8-10 दिन में अंकुरित हो जाते है|

सिंचाई किस प्रकार करें –

पहली सिंचाई की आवश्यकता तो नहीं होती है क्यों की बीजों की बुवाई सींचित अवस्था में की जाती है |बीज  बोने के 10-15 दिन बाद दूसरी सिंचाई करनी चाहिए। उसके बाद अगर नियमित वर्षा होती रहे तो पानी देने की आवश्यकता नही रहती। बाद में महीने में एक बार सिंचाई करते रहना चाहिए। अगर बीच में वर्षा हो जाए तो सिंचाई की आवश्यकता नही पड़ती। वर्षा न होने पर जीवन रक्षक सिंचाई करनी चाहिए। अधिक वर्षा या सिंचाई से फसल को हानि हो सकती है| इसका विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए |


रोगों से इसका बचाव

1.इसकी जड़ों का बहुत अधिक महत्व होता है इसलिए जड़ों को निमेटोड के प्रकोप से बचाने के लिए 5-6 कि.ग्रा ग्राम फ्यूराडान प्रति हैक्टर की दर से बुआई के समय खेत में मिला देना चाहिए।

2.पत्ती की सड़न (सीडलीग ब्लास्ट) व लीफ स्पाट सामान्य बीमारियां हैं। जो खेत में पौधों की संखया कम कर देती हैं। अतः बीज को डायथीन एम-45 से उपचारित करके बोना चाहिए।

3.एक माह पुरानी फसल को 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में डायथीन एम-45 मिलाकर 7-10 दिन के अंतर पर छिड़काव करते रहना चाहिए जब तक बीमारी नियंत्रित न हो जाए। पत्ती भक्षक कीटों से फसल को सुरक्षित रखने के लिए रोगर या नुआन 0.6 प्रतिशत का छिड़काव 2-3 बार करना चाहिए।

उपज

आमतौर पर एक हैक्टर से 6 से 7.5 कुंतल ताजा जड़ें प्राप्त होती हैं जो सूखने पर 3 से 4.5 क्विंटल रह जाती है। इससे 50-60 किलो बीज प्राप्त होता है। जो पैदावार की नज़र से काफी अच्छी मानी जाती है |

माल कहाँ बेचें

आप चाहे तो अश्वगंधा को सीधा अपने बाजार में लोकल कस्टमर के बीच उतार सकते है। आप इसे रिटेल भी कर सकते हैं  एवं बेहतर डील मिलने पर व्होलसेल की दर पे भी बेच सकते हैं। इसके कई व्यापारी आपको एडवांस तक देते हैं। ये एक नकद बिकने वाली फसल है तथा देश से लेकर विदेश तक इसकी मांग लगातार भी बढ़ रही है। ऑनलाइन के इस जग में आप चाहे तो अपने मखाने की पैकेजिंग कर फ्लिपकार्ट, अमेज़न इत्यादि साइट पर भी बेच सकते है।

आशा करते है अश्वगंधा की खेती से जुडी यह लेख आपको पसंद आयी होगी। अपने किसान भाईयों को जागरूक कर स्वरोज़गार मुहैया कराने हेतु शुरुवात की गयी इस मुहीम से जुड़े रहने के लिए हमें सब्सक्राइब करना न भूले। इसी तरह की जानकारी पाने के लिए  ग्रामीण शिक्षा  को अपना सहयोग दे। मखाने के उत्पादन से जुड़ी किसी भी तरह के समस्याओं के समाधान हेतु नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना न भूले।

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