अरहर की खेती कैसे करें की उपज बढ़ाये और कमाए अच्छा मुनाफा।

अरहर की खेती, arhar ki kheti
अरहर की खेती

अरहर की खेती: अरहर की दाल का स्वाद हिंदुस्तान के सभी घरों की रसोई में मिलती है। हर रसोई में इसका अपना ही वजूद है। हर उम्र के लोगों में अरहर की दाल की दिलचस्पी कभी कम नहीं होती चाहे बच्चे हों या उम्रदराज लोग अरहर की दाल का स्वाद सबके लिए लोकप्रिय रहा है। चाहे गाँव हो या शहर इसका स्वाद हर घर की रसोई में मिलता है। अरहर की खेती भारत में तीन हजार वर्षो पूर्व से होती आ रही है किन्तु भारत के जंगलों में इसके पौधे नहीं पाये जाते है। अफ्रीका के जंगलों में इसके जंगली पौधे पाये जाते है। इस आधार पर इसका उत्पत्ति स्थल अफ्रीका को माना जाता है। सम्भवतया इस पौधें को अफ्रीका से ही एशिया में लाया गया है। दलहन प्रोटीन का एक सस्ता स्रोत है जिसको आम जनता भी खाने में प्रयोग कर सकता है, लेकिन इनका उत्पादन आवश्यकता के अनुरूप नहीं है। यदि प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ानी है तो दलहनों का उत्पादन बढ़ाना होगा। इसके लिए उन्नतशील प्रजातियां और उनकी उन्नतशील कृषि विधियों का विकास करना होगा। पादप प्रजनन के नये तरीकों से संकर प्रजातियों का विकास किया जा रहा है। इससे दलहनों का सकल उत्पादन बढ़ने की प्रबल संभावनाएं हैं।

अरहर की फसल से अन्य लाभ

एक कहावत तो हमसबने सुनी ही है की आम के आम और गुठलियों के दाम। ये बात अरहर की फसल पर भी लागू होती है। क्यों की इसकी फसल से भी आप अन्य कई लाभ ले सकते हैं। ठीक उसी तरह से आप इस फसल में भी लाभ ले सकते हैं। जैसे की आप चाहें तो इसकी हरी पत्तियों से टोकरी का निर्माण कर सकते हैं इसके अतिरिक्त इसकी हरी फलियां सब्जी के लिये, खली चूरी पशुओं के लिए रातव, हरी पत्ती चारा और तना ईंधन, झोपड़ी और टोकरी बनाने के काम लाया जाता है। इसके पौधों पर लाख के कीट का पालन करके लाख भी बनाई जाती है। इसमें मांस की तुलना में प्रोटीन भी अधिक (21-26 प्रतिशत) पाई जाती है।

अरहर खाने से होने वाले कुछ अदभुत फायदे

  • हड्डियों की मजबूती: शोधकर्ताओं के अनुसार अरहर की दाल खाने से कैल्शियम और फोलिक एसिड भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत तो बनाते ही हैं साथ ही दिमाग की हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ बनाते हैं। इसका इस्तेमाल बच्चों को जरुर करना चाहिए। क्यूं कि दाल में सभी पोषक तत्व होते हैं जिनकी हमारे शरीर को जरुरत होती है।
  • डायबिटीज: शोधकर्ताओं के अनुसार अरहर की दाल में फाइबर पर्याप्त मात्रा में होता है जो हमारे शरीर के लिए बहुत लाभ दायक होता है। इसके सेवन से अगर कोई डायबिटीज का मरीज है तो उसको बहुत फायदा मिलता है साथ ही इसके रेगुलर सेवन से इस बीमारी से भी बचा जा सकता है। मधुमेह को दूर भगाने में अरहर दाल बहुत मदद करता है इसलिए इसका इस्तेमाल सभी को जरुर करना चाहिए।
  • खून (Blood): अरहर दाल के सेवन से हमारे शरीर को जरुरी तत्व जैसे आयरन, प्रोटीन और भी बहुत से तत्व मिल जाते हैं जिससे हमारे शरीर में खून की कमी नही होती है और इसका सेवन करने से खून से सम्बंधित बीमारी नही होती है। इसलिए अरहर की दाल हमारे लिए बहुत उपयोग होती है।
  • कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित: दोस्तों अरहर दाल खाने से कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से शरीर में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। 
  • कैंसर से बचाए:  शोधकर्ताओं के अनुसार अरहर की दाल खाने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से भी बचा जा सकता है क्यों कि इसमें सभी तत्व पाए जाते हैं जो की कैंसर को खत्म करते हैं और हमे स्वस्थ रखते हैं।
  • दिल के लिए फायदेमंद: शोधकर्ताओं के अनुसार दिल के लिए एंटी ओक्सिडेंट और फाइबर जैसे तत्वों की मौजूदगी से अरहर की दाल हमारे लिए हर तरह से उपयोगी है। इसका सेवन करने से हमारा दिल यानि heart स्वस्थ रहता है और दिल से सम्बंधित बीमारी नही होती। अगर किसी को heart अटैक जैसी बीमारी हो तो उसमे भी लाभ होता है।

अरहर की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

अरहर नम तथा शुष्क जलवायु का पौधा है। इसकी वानस्पतिक वृद्धिबढवार के लिए नम जलवायु की आवश्यकता होती है। अरहर के पौधे में फूल, कली व दाने बनते समय शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। 75 से 100 सेंटीमीटर वाले स्थानों में अरहर की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। किसान भाई अरहर की खेती भारी वर्षा वाले स्थानों में बिलकुल न करें।

खेती के लिए भूमि का चुनाव

खेती करने से पहले आप अपनी मिटटी की जांच करा लें। मिटटी की जांच करने के बाद आपको पता चल जायेगा की मिटटी खेती के लिए अनुकूल है या नहीं। जांच कराने के लिए आप मिटटी का सैंपल लेकर अपने राज्य के मिटटी जांच करने वाले लैब में जाकर उसका जांच करा लें। इससे आपको आगे होने वाली समस्या का सामना करने से बचाव मिल जायेगा। वैसे तो ये कई तरह की मिटटी में भी उपज दे देता है। पर फिर भी शोधकर्ताओं के अनुसार इससे आप अगर निम्न हैं। अरहर की फसल के लिए बलुई दोमट वा दोमट भूमि अच्छी होती है। उचित जल निकास तथा हल्के ढालू खेत अरहर के लिए सर्वोत्तम होते हैं। लवणीय तथा क्षारीय भूमि में इसकी खेती सफलतापूर्वक नहीं की जा सकती है। अरहर की खेती काली मृदा में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। अच्छी जल धारण व चूने की पर्याप्त उपलब्धता वाली भूमि में अरहर की खेती से अधिकतम उत्पादन लिय जा सकता है।

खेत की तैयारी किस प्रकार से करें

खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करने के बाद 2-3 जुताइयां देसी हल से करनी चाहिए। जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत को तैयार कर लेना चाहिए।

बीज का चुनाव व् उसकी खरीद

सर्वप्रथम एक कि.ग्रा. बीज को 2 ग्राम थीरम तथा एक ग्राम कार्बोन्डाजिम के मिश्रण अथवा 4 ग्राम ट्रइकोडर्मा + 1 ग्राम कारबाक्सिन या कार्बिन्डाजिम से उपचारित करें। बोने से पहले हर बीज को अरहर के विशिष्ट राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें। एक पैकेट 10 कि.ग्रा. बीज के ऊपर छिड़ककर हल्के हाथ से मिलायें जिससे बीज के ऊपर एक हल्की पर्त बन जाये। इस बीज की बुवाई तुरन्त करें। तेज धूप से कल्चर के जीवणु के मरने की आशंका रहती है। ऐसे खेतों में जहाँ अरहर पहली बार काफी समय बाद बोई जा रही हो, कल्चर का प्रयोग अवश्य करें। बीज खरीदने के लिए आप अपने राज्य के बीज भण्डारण केंद्र में जाकर उसकी गुद्वात्ता के आधार पर खरीद सकते हैं। आप किसी सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थान से भी बीज खरीद सकते हैं।

बुवाई करने की सही विधि

खेत में हल के पीछे कूंड़ों में करनी चाहिए। प्रजाति तथा मौसम के अनुसार बीज की मात्रा तथा बुवाई की दूरी निम्न प्रकार रखनी चाहिए। बुवाई के 20-25 दिन बाद पौधे की दुरी, सघन पौधे को निकालकर निश्चित कर देनी चाहिए। यदि बुवाई रिज विधि से की जाए तो पैदावार अधिक मिलती है।

अरहर की उन्नतशील प्रजातियाँ

जल्दी से पकने वाली फसल:

1. पारस: जून प्रथम सप्ताह 130-140 दिनों में पककर तैयार हो जाता है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्रों में इस प्रजाति की फसल की जा सकती है।

2. यू.पी.ए.एस./UPAS: 120 जून प्रथम सप्ताह 130-135 दिनों में पककर तैयार उ.प्र.(मैदानी क्षेत्र) नवम्बर में गेहूं बोया जा सकता है। 3 पूसा-992 जून प्रथम सप्ताह 150-160, 16-20 उकठा रोग अवरोधी 4 टा-21 अप्रैल प्रथम सप्ताह तथा जुन के प्रथम सप्ताह 160-170, 16-20 सम्पूर्ण उ.प्र. के लिए उपर्युक्त

सिंचाई करने का सही तरीका

सिंचाई की आवश्यकता इसे होती ही है इसलिए बुवाई करने के उपरान्त ही आप इसकी हलकी हलकी सी सिंचाई शुरू कर दें इससे फसल को पर्याप्त मात्र में पानी मिलता रहेगा और ध्यान दें की जब भी आप इसकी सिंचाई करें तो पानी की निकासी भी उतनी ही जरुरी है जितनी की सिंचाई अन्यथा फसल खराब भी हो सकती है इसलिए इस कार्य को बड़ी सावधानी पूर्व करें।

फसल की कटाई का सही समय

फसल की कटाई करते समय आपको ध्यान देना होगा की पत्तियों का रंग किस प्रकार का है। और कटाई करने से पूर्व आप इसके कुछ फलियों को तोड़कर देखें की क्या उसमें ठीक से दाना आ गया है की नहीं अगर आपको दाना ठीक नहीं लगता तो आप उस समय उसकी कटाई ना ही करें उसे और कुछ दिन के पश्चात काटें सबको एक स्थान पर एकत्रित करलें उसके पश्चात फलियों में से दानों को किसी साफ़ स्थान पर ले जाकर रख दें।

माल को कहाँ बेचें

अरहर की खेती में लाभ की पूरी ही सम्भावना होती है क्यों की ये एक दलहन फसल होने के साथ साथ नकदी फसल भी है आप अपने निकट के व्यापारियों से सम्पर्क करके भी इसे अपनी इच्छा के अनुसार बेच सकते हैं या आप चाहें तो अपनी खुद की पैकिंग देकर भी इसको बेच सकते हैं आप ऑनलाइन के माध्यम से भी सीधे इसे रिटेल अथवा होलेसले के माध्यम से बेच सकते हैं। और एक अच्छा लाभ भी कमा सकते हैं ऑनलाइन के माध्यम से आप इसे अमेज़न, फ्लिप्कार्ट, बिगबास्केट, इंडिया मार्ट जैसी कम्पनी के माध्यम से अपना माल सीधे तौर पे भी बेच सकते हैं। या अगर आप चाहें तो पुरानी दिल्ली की मशहूर खारी बावली जो की पुरे एशिया महादीप की सबसे बड़ी अनाज मंडी है वहां जाकर किसी भी व्यापारी से बातचीत करके भी अपना माल बेच सकते हैं।

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चित्र साभार: indiamart

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