एलोवेरा की खेती: कैसे करें, कितना मुनाफ़ा है, इसके अदभुद फायदे, कितने क़िस्म होते हैं, अनुकूल जलवायु इत्यादि

एलोवेरा की खेती: एलोवीरा एक अनोखी लाभदायक फसल है जिसको उगाने वाले किसानो का कहना है की इस फसल ने उनकी पूरी पीढ़ी  तक की दिक्कत दूर कर दी जी हां क्युकी ये एक ऐसी फसल भी है जिसकी डिमांड आयुर्वेदिक कम्पनी से लेकर कई मेडिसिन कम्पनी इसकी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से लेकर सीधे तौर पे या फिर निजी फायदे के लिए कराती है।

इसके मुख्य नाम:- एलोवेरा, ग्वारपाठा, घृतकुमारी

इसकी खोज

कार्ल लिन्नायूस ने इसको 1753 में पहली बार एलोवेरा के रूप में वर्णित किया था। उसके बाद निकोलस लौरेंस बर्मन ने 6 अप्रैल 1768 वनस्पति इंडिका में इसका वर्णन किया। फिर तकनीको का उपयोग कर एलोवेरा को यमन के स्थानिक प्रजाति एलो पेर्रयी के निकटतम पाया गया।

कम पूंजी और कम पानी की अनोखी खेती

एलोवेरा की खेती करने में आपको कम लागत और मेंटेनेंस आता है और सबसे अच्छा तो यह है के इसमें ज़्यादा पानी पटाने की आवशयकता भी नहीं पड़ती है। यदि आप रेगिस्तानी इलाके में राजस्थान और उसके आस पास के गाओं से हैं तो आपके लिए तो बहुत ही अच्छा है क्यूंकि अलोएवेरा रेतीली मिटटी और गरम तापमान वाले क्षेत्र में बहुत तेजी से बढ़ता है। यदि आप राजस्थान  के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड, बंगाल या किसी भी अन्य जगह से हैं तब भी आप एलोवेरा की खेती बड़े आसानी से कर सकते हैं।

एलोवेरा के अदभुद फायदे

  • एलोवेरा से यु तो बहुत से गुणकारी प्रोडक्ट्स बनाये जाते हैं फिर भी इसका उपयोग विशेषकर दवाई बनाने से लेकर ब्यूटी प्रोडक्ट्स तक में किया जाता है। आईये जानते हैं इससे जुड़े कुछ अदभुद फायदे के बारे में
  • इसका रोजाना सुबह उठकर जूस पीने से दिन भर की थकान से आराम मिलता है और शरीर में ताजगी बनी रहती है।
  • इसके सेवन करने से मधुमेह जैसे रोग पर भी काबू पाया जा सकता है। भूख बढानें में भी काफी लाभदायक साबित होता है इसके प्रतिदिन सेवन करने से आप अपनी भूख न लगने की समस्या से भी निजात पा सकते हैं।
  • एलोवेरा जूस पीने से मेटोबॉलिज्म को भी मजबूती मिलती है। सुबह सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस से आपके शरीर का मेटाबॉलिज्‍म 24 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि आप खाने को जल्‍द पचा सकेगें। जब खाना ठीक से पच जाता है तो शरीर अन्य समस्याओं से भी बच जाता है।
  • खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से रेड ब्‍लड सेल्‍स जल्‍दी जल्‍दी बढ़ने लगते हैं। इसलिए अगर आपको खून की कमी है तो आप रोजाना इसे पीयें इससे आपको बहुत लाभ मिलेगा।
  • इसका जुस रोजाना पीने से त्वचा में निखार आता है व् सुन्दरता बनी रहती है।
  • वजन कम करने में भी बहुत लाभदायक साबित होता है इसके रोजाना सेवन से आप अपने वजन को भी कम कर सकते हैं।

एक कप एलोवेरा में से मिलने वाला तत्व

कैलोरी131कार्ब्स 95%, फैट 2%
कार्बोहाइड्रेट31.92 ग्राम11%
प्रोटीन0.89 ग्राम3%
कैल्सियम40 मिली ग्राम3%
विटामिन सी18 मिली ग्राम31%
पोटैशियम724.2 मिली ग्राम21%
सोडियम10 ग्राम1%

इसके सेवन से होने वाले कुछ नुक्सान

  • अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन करने से ये हानिकारक भी साबित हो सकता है। एलोवेरा के रस में अन्थ्रक़ुइनोने नामक पदार्थ पाया जाता है इसलिए अगर हम इसकी अत्यधिक मात्रा में सेवन करें तो इससे डायरिया होने की सम्भावना बन सकती है।
  • पीलिया के रोगी इसका सेवन भूल कर भी न करें एलोवेरा के जूस में लेटेक्स होता है जिससे कई तरह की स्वास्थ्य परेशानी सम्बन्धी बढ़ सकती है।
  • गर्भवती महिलाएं या जो बच्चे को दूध का सेवन कराती है उन स्त्रियों को इसका सेवन करने से बचना चाहिए। यह गर्भवती महिलायों के गर्भ को संकुचित कर सकता है जिस वजह से उनके गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
  • लम्बे समय तक एलोवेरा के जूस के सेवन से स्यूडोम्मेलानोसिस कोली का कारण बनता है, जिस वजह से अगर इसका सेवन ज्यादा किया जाए तो यह कैंसर जैसी बीमारी के होने की सम्भावना को बढ़ा सकता है।

एलोवेरा का सेवन

एलोवेरा को सीधे तौर पर खाने में थोड़ी दिक्कत हो सकती है क्योकि इसका स्वाद प्राकृतिक रूप से थोडा सा कडवा होता है, जिससे आप इसको सही मात्रा में नहीं खा पाएंगे। इसके लिए आप इसके जेल का कुछ सब्जियों या फलों के साथ मिश्रण तैयार करके इसे ग्रहण कर सकते है। अगर आप चाहे तो इसमें शहद और नींबू की भी कुछ बूंदे मिला कर सेवन कर सकते है।

एलोवेरा की प्रजातियाँ

एलोवेरा की कई प्रजातियां पाई जाती है जिसमे सबसे ज्यादा मशहुर है। चैन्सिस, लित्तोराल्लिस, एलो अब्यस्सिनिका। भारत में इसकी मिलने वाली उच्च उत्पादक प्रजातियां है- आईईसी 111271, एएएल1, आईईसी 111269. 

खेती करने से पहले भूमि की तैयारी

इसकी खेती के लिए आपको किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी क्यों की इसकी खेती के लिए आप किसी भी प्रकार की मिटटी का चयन कर सकते हैं और इसमें आपको सिंचाई के लिए भी चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। आप रेतीली मिटटी में भी इसकी खेती कर सकते हैं। भूमि का चुनाव इस प्रकार से करें जहा पर आसानी से पानी निकल जता हो आपको किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े भूमि को उची नीची करके तैयार करें ताकि वहां पर किसी भी तरह का जल जमाव न हो सके। भूमि को जोतने की, मानसून के शुरू होने से पहले आप खेत को तैयार रखें, जमीन को इस तरह से जोतें की कोई मिटटी का ढेला ज्यादा नहीं रहे इसके बाद आपको चाहिए के आप 12 -15 टन खाद को मिला कर उसे फिर से जोतें।

बीज कहाँ से खरीदें

बीज की खरीदारी करने से पहले आप ध्यान दें की आप इसकी हायब्रीड बीज का ही चुनाव करें। आप इसे सरकारी संसथान से खरीद सकते हैं।

राज्य बीज भंडार केंद्र से भी लिया जा सकता है। कुछ बीज की गुद्वात्ता बहुत उपयोगी साबित होती है अभी तक जो तेज़ गति से बढती हैं तथा उनमें रोग लगने की भी समस्या नही आती है जिनमे से दो निम्न है।–

 IEC 111269, IEC 111271

बुवाई की सही विधि क्या होती है

बुवाई के लिए क्यारियों को बना कर एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच 50 सेंटीमीटर की दूरी रखते हुए पौधों को रोपा जाता है। पौधों को लगाने का सबसे बेहतर समय फ़रवरी-मार्च और जून-जुलाई का महिना है, वैसे इसकी खेती साल भर भी हो सकती है। 1 हेक्टेयर भूमि में लगभग 10,000 तक पौधों को रोपा जा सकता है। पौधों को रोपने के बाद हल्के पानी से सिंचाई करें। एलोवेरा के पौधों को एक बार लगाकर इसकी फसल को तीन वर्ष तक काटा जा सकता है। पौधा लगने के बाद 8 से 10 महीने में यह कटाई के लिए तैयार हो जाता है। पहले वर्ष में उत्पादन लगभग 50 टन, दुसरे वर्ष में इसके उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो जाती है।

सिंचाई का समय अंतराल

हमने आपको शुरू में भी बताया था की आपको इसमें सिंचाई के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी है क्यों की आप इसको 15 दिन के अंतराल में भी पानी दे सकते हैं।

कीट नाशक छिडकाव

मीली कीड़ा एलोवेरा के पौधे को नष्ट करदेता है इसका मुख्य लक्षण है के आप के उगते एलोवेरा के पौधे में चित्ता दाग लगने लगता है इसी से पौधा पूरा ख़राब होने का खतरा रहता है तथा आपको चाहिए के सही कीटनाशक का छिड़काव अवश्य करें आप 0.2% of malathion aqueous सलूशन या 0.1% of पैराथीओन का छिडकाऊ करें और हफ्ते में एक बार 0.2% dithane M-45 का भी छिड़काव करें इससे आपके पौधे नष्ट नहीं होंगे।

फसल की कटाई

एलोवीरा की फसल की कटाई आप लगभग 8 महीने के बाद  कर सकते हैं। पौधे को जड़ से कभी न कटे क्यूंकि उसी जड़ से दोबारा एलोवीरा  उगता है आपको चाहिए के आप ऊपर के बड़े पत्ते को हाथों से सावधानी रखते हुए तोड़े, दूसरे वर्ष से लेकर पांचवे वर्ष तक आप कटाई करेंगे बिना दोबारा रोपण किये हुए।

माल कहाँ और किसको बेचें

अपने एलोवीरा को बेचने के लिए दवाई की कम्पनियां, कॉस्मेटिक, आयुर्वेदिक कम्पनिया को ही मुख्य रूप से टारगेट करें। यदि आप अपना एलोएवेरा जूस बनाकर ऑनलाइन सेल करते है, अपनी ब्रांडिंग के साथ  तो यह आपके मुनाफा को दुगना कर देगा। आप खेती के दौरान ही किसी भी कम्पनी को संपर्क करके भी माल को बेच सकते हैं। ऑनलाइन के लिए आप फ्लिप्कार्ट, अमेज़न, बिग बॉस किट जैसी कम्पनी से सीधे संपर्क करके उनको अपना माल बेच सकते हैं।

आशा करते है एलोवीरा की खेती से जुड़ी यह लेख आपको पसंद आयी होगी। अपने किसान भाईयों को जागरूक कर स्वरोज़गार मुहैया कराने हेतु शुरुवात की गयी इस मुहीम से जुड़े रहने के लिए हमें सब्सक्राइब करना न भूले। इसी तरह की जानकारी पाने के लिए एडुफ़ीवर ग्रामीण शिक्षा को अपना सहयोग दे। एलोवीरा के उत्पादन से जुड़ी किसी भी तरह के समस्याओं के समाधान हेतु नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करना न भूलें।

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