‘न्यायशास्त्र’ कोर्स पासआउट होते ही बन जायेंगे जज, आप भी जाने इस कोर्स के बारे में।

न्यायशास्त्र कोर्स

क्या आप चाहते है की देश में कोई ऐसा कोर्स भी हो जिसे पूरा करने के बाद जिस तरह इंजीनियर की उपाधि मिल जाती है। उसी तरह से ‘जज’ की उपाधि मिल जाएगी। सुनकर आपको हैरानी होगी पर देश में ही नहीं बल्कि दुनिया में महाराष्ट्र नेशनल लॉ युनिवर्सिटी (MNLU) ने एक ऐसा न्यायशास्त्र कोर्स पढाने का मन बना लिया है जिसे पासआउट करते ही छात्र सीधे जज बन जाएगा। सुनकर हैरानी हो रही है पर यह सच है, आइये जानते है की किसने इस कोर्स के बारें में जानकारी दी है और इस कोर्स का नाम क्या है।

MNLU के चांसलर जस्टिस शरद बोबड़े ने बताया

शरद बोबड़े के अनुसार MNLU विश्व की पहली ऐसी युनिवर्सिटी होगी जिसमे ‘न्यायशास्त्र’ जैसा कोर्स पढाया जाएगा। इस कोर्स को पूरा करने के बाद छात्र किसी भी कोर्ट में किसी भी केस को हैंडल करने में सक्षम होंगे। इससी के साथ उन्होंने बताया की उनका मकसद राज्य को फर्स्ट क्लास जज उपलब्ध करवाना है और अगर कोई भी राज्य का छात्र इस कोर्स को पूरा करता है तो वह जज बनने के काबिल हो सकता है।

यह पहली बार कोई युनिवर्सिटी कर रही है

न्यायशास्त्र जैसा कोई भी कोर्स विश्व में नहीं करवाया गया पर MNLU ने अपने इस फैसले से विश्वभर में एक ऐसी पहचान बना ली है जो ऐसा कोर्स पहली बार पढ़ा रही है। शरद बोबड़े के अनुसार इस कोर्स की मदद से जज बनने की प्रक्रिया भी बदलेगी एंव समय के साथ इस कोर्स में अलग-अलग विषय शामिल किये जायेंगे ताकि हम अपने राज्य को सर्वेश्रेष्ट जज देने में सक्षम हो।

न्यायशास्त्र क्या है?

न्यायशास्त्र को विधिशास्त्र भी कहा जाता है, जिसे विधि का सिद्धान्त, अध्ययन व दर्शन हो उसे न्यायशास्त्र कहते है। विधिशास्त्र जिसे “जूरिसप्रूडेंस” अर्थात् Juris = विधान, Prudence = ज्ञान। इसमें समस्त विधिक सिद्धान्त सम्मिलित है जिससे कानूर बनाये जाते है। न्यायशास्त्र का विद्वान, जिन्हें जूरिस्ट या विधिक सिद्धान्तवादी भी कहा जाता हैं। न्यायशास्त्र जिसे विधि, विधिक कारणन, विधिक प्रणाली और विधिक संस्थाओं के प्रकृति की गहरी समझ प्राप्त करने की आशा रखते हैं। इस अर्थ में कानून की सारी पुस्तकें विधिशास्त्र की पुस्तकें हैं।

इस प्रसंग में कानून का एकमात्र अर्थ होता है देश का साधारण कानून (Civil Law), जो उन नियमों से सर्वथा पृथक् है, जिन्हें कानून से सादृश्य रहने के कारण कानून का नाम दिया जाता है। यदि हम विज्ञान शब्द का प्रयोग इसके अधिक से अधिक व्यापक रूप में करे जिसमें बौद्धिक अनुसंधान के किसी भी विषय का ज्ञान हो जाए तो हम कह सकते हैं कि विधिशास्त्र देश के साधारण कानून का विज्ञान है।

(न्यायशास्त्र का अंग्रेज़ी: Jurisprudence)

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